
बेंगलूरु. अधिवक्ताओं के अदालती कामकाज का बहिष्कार करने के कारण बुधवार को कर्नाटक उच्च न्यायालय सहित राज्य के सभी जिलों में अदालतों का कामकाज प्रभावित हुआ। वकीलों के सुनवाई के लिए पेश नहीं होने के कारण अधिकांंश अदालतों में मामलों की सुनवाई टालनी पड़ी।
राज्य अधिवक्ता परिषद ने पिछले सप्ताह अधिवक्ताओं से अदालती कामकाज के बहिष्कार करने का आह्वान किया था। बेंगलूरु अधिवक्ता संघ सहित अन्य अधिवक्ता संघों ने भी बहिष्कार के आह्वान का समर्थन किया था। बुधवार को उच्च न्यायालय व निचली अदालतों में सिर्फ उन्हीं मामलों की सुनवाई हुई जिसमें पक्षकार खुद पैरवी कर सकते थे।
बाकी सभी मामलों की सुनवाई टल गई। बेंगलूरु में भी जिला और महानगरीय दंडाधिकारी अदालतों, राजस्व अदालतों व पंचाटों में कामकाज प्रभावित हुआ। वकीलों के संगठनों ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के जस्टिस जयंत पटेल का अचानक इलाहाबाद उच्च न्यायालय में तबादला करने के फैसले के विरोध में बहिष्कार का आह्वान किया था।
अधिवक्ताओं का कहना था कि जस्टिस पटेल उच्च न्यायालय के सबसे वरिष्ठ जज थे और ९ अक्टूबर को मौजूदा मुख्य न्यायाधीश की सेवानिवृति के बाद वे इस पद के दावेदार थे लेकिन अन्यायपूर्ण तरीके से एक पखवाड़े पहले उनका तबादला दूसरे उच्च न्यायालय में कर दिया गया। कोलेजिएम के फैसले से नाराज जस्टिस पटेल ने पिछले सप्ताह ही इस्तीफा दे दिया था।
बेंगलूरु अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष एचसी शिवराम ने कहा कि न्यायाधीश जयंत पटेल के साथ हुए इस अन्याय के खिलाफ आक्रोश व्यक्त करने के लिए राज्य के अधिवक्ताओं ने अदालतों के कामकाज का बहिष्कार करने का फैसला लिया था। साथ में अधिवक्ता संघ शीर्ष अदालत के कोलेजिएम को यह संदेश देना चाहता है कि भविष्य में ऐसे अन्याय पूर्ण फैसले सहन नहीं किए जाएंगे।
एक अन्य सवाल के जबाव में उन्होंने कहा कि अदालतों में न्यायाधिशों के कई पद रिक्त होने के कारण लंबित मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कर्नाटक उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों के ६२ पद स्वीकृत हैं लेकिन अभी सिर्फ २४ न्यायाधीश ही हैं। इनमें से भी कई अगले साल सेवानिवृत हो जाएंगे। रिक्त पदों को भरने की मांग को लेकर विभिन्न राज्यों के अधिवक्ता शीघ्र ही दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना देंगे।
Published on:
05 Oct 2017 09:32 pm
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