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हार के बाद कांग्रेस में नहीं थम रहा बवाल

लोकसभा चुनाव हारने के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में असंंतोष बढ़ता जा रहा है। कुछ नेताओं ने पार्टी की हार के लिए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दिनेश गुंडुराव व सिद्धरामय्या को निशाना बनाया, तो कुछ नेताओं ने राष्ट्रीय महासचिव व प्रदेश मामलों के प्रभारी के.सी. वेणुगोपाल को हटाने की मुहिम छेड़ दी है।

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हार के बाद कांग्रेस में नहीं थम रहा बवाल

बेंगलूरु. लोकसभा चुनाव हारने के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में असंंतोष बढ़ता जा रहा है। कुछ नेताओं ने पार्टी की हार के लिए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दिनेश गुंडुराव व सिद्धरामय्या को निशाना बनाया, तो कुछ नेताओं ने राष्ट्रीय महासचिव व प्रदेश मामलों के प्रभारी के.सी. वेणुगोपाल को हटाने की मुहिम छेड़ दी है।

पूर्व मंत्री आर.रोशन बेग, रामलिंगा रेड्डी, एच.के.पाटिल जैसे नेता पार्टी की प्रदेश इकाई में उभरे असंतोष के लिए सिद्धरामय्या के साथ ही वेणुगोपाल को भी बराबर का दोषी बता रहे हैं। उनका कहना है कि वेणुगोपाल के प्रभारी बनने के बाद से संगठन का ढांचा चरमरा गया है और उनके रुखे स्वभाव व सभी को विश्वास में लेकर काम नहीं करने के कारण पार्टी को सत्ता में रहने के बावजूद लोकसभा चुनाव में शर्र्मनाक हार झेलनी पड़ी है।

वरिष्ठ नेताओं का आरोप है कि वेणुगोपाल प्रदेश की जमीनी वास्तविकताओं से अनजान हैं लिहाजा पिछले लोकसभा चुनाव में वे आलाकमान को क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों के अनुसार उम्मीदवारों के चयन की सही राय देने व प्रचार की सटीक रणनीति बनाकर लागू करने में विफल रहे। यह भी आरोप है कि वेणुगोपाल प्रदेश के सभी नेताओं को विश्वास में लेकर काम करने के बजाय सिद्धरामय्या की सलाह पर काम करते हैं। इसी तरह समन्वय समिति की बैठकों में भी पार्टी के पक्ष को मजबूती से पेश करने में भी उन पर विफल रहने के आरोप हैं

वरिष्ठ नेता एचके पाटिल की नेताओं के मतभेद सुलझाने में राहुल गांधी के दखल की मांग को भी वेणुगोपाल की अक्षमता के तौर पर देखा जा रहा है। असंतुष्टों का तर्क है कि यदि वेणुगोपाल ने सबके साथ तालमेल बनाकर काम किया होता रखा होता तो आज प्रदेश इकाई में असंतोष इतना नहीं बढ़ता।