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दो साल बाद शिमला के अस्पताल में परिवार से मिली मैसूरु की पद्मा

सीएम के आदेश पर कार्रवाई: भाषा की दीवार बन गई थी मुश्किल

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padma with himachal pradesh cm

दो साल बाद शिमला के अस्पताल में परिवार से मिली मैसूरु की पद्मा

बेंगलूरु. आखिरकार दो साल के लंबे इंतजार के बाद मैसूरु जिले के मकनहल्ली गांव की रहने वाली पद्मा उर्फ सरस्वती को (४०) को उसका परिवार मिल गया। भाषा की समस्या के कारण शिमला के एक मानसिक अस्पताल में भर्ती पद्मा की पीड़ा बार-बार मीडिया में आने के बाद कर्नाटक और हिमचाल प्रदेश के मुख्यमंत्रियों के सहयोग से पद्मा अपने परिवार से मिल पाई।
एक पखवाड़े पहले कर्नाटक के मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी ने अधिकारियों को पद्मा के परिवार का पता लगाने और उसे घर लाने के लिए कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। हालांकि, साल भर पहले भी प्रशासन ने पद्मा के परिजनों को खोजने की कोशिश की गई थी लेकिन तब सफलता नहीं मिली थी।
पद्मा को लाने के लिए बुधवार को कर्नाटक से चार लोगों का एक दल शिमला पहुंचा। इसमें युवती का चचेरा भाई, मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम अधिकारी डॉ. मंजू प्रसाद, बाल विकास परियोजना अधिकारी मंजुला पाटिल और एक महिला पुलिसकर्मी शामिल थीं।
अस्पातल से महिला को लेने के बाद दल के सदस्य मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और उनकी पत्नी डॉ. साधना ठाकुर से मिलने उनके सरकारी आवास ओकओवर पहुंचे। ठाकुर दंपती ने पद्मा के परिजनों से पुनर्मिलन पर खुशी जताते हुए उसके उज्जवल भविष्य की कामना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि भाषा और स्वास्थ्य के कारण पद्मा के परिजनों के बारे में पता लगाने में काफी मुश्किल हुई लेकिन मीडिया ने इसमें बड़ी भूमिका निभाई।
मूलत: कर्नाटक के शिवमोग्गा जिले की रहने वाली साधना ने पद्मा से कन्नड़ में बात भी की। मुख्यमंत्री और उनकी पत्नी को एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान पद्मा की व्यथा के बारे में जानकारी मिली थी और उसके बाद ही हिमचाल सरकार ने पद्मा के परिजनों का पता लगाने के लिए कर्नाटक से संपर्क किया था। युवती के घर वालों को ढूंढने में अहम भूमिका निभाने वाली डॉ. सुनीला, डा. संजय त्रिपाठी और अन्य भी इस मौके पर मौजूद थे। सबने पद्मा को भावनात्मक विदाई दी। युवती बुधवार को शिमला से चंडीगढ़ के लिए रवाना हुई जहां से वह कर्नाटक से आए दल के साथ हवाई जहाज से बेंगलूरु ले जाई जाएगी तथा वहां से मैसूर जिले में उसके पैतृक गांव पहुंचाया जाएगा।

रंग लाई डॉ सुनीला शर्मा की कोशिश
युवती इस अस्पताल व पुनर्वास केंद्र में समाज सेवा का कार्य करने वाली शिमला की संस्था परफार्मेंस गु्रप ऑफ आट्र्स के संपर्क में आई। संस्था की अध्यक्ष डॉ. सुनीला शर्मा को युवती को लेकर कुछ शंका तब हुई जब उन्होंने ने उसकी भाषा समझने का प्रयास किया।
उन्होंने कन्नड़ जानने वाली अपनी एक सहेली को पद्मा के बारे मेें बताया तो इतना पता चला कि वह मैसूरु जिले की रहने वाली है और उसके पति ने दूसरी शादी के बाद उसे घर से निकाल दिया था। वह काम की तलाश किसी के साथ बेंगलूरु आई थी। उसने बताया कि उसे बेहोश कर ट्रेन के डिब्बे में फेंक दिया गया गया था और वह हिमाचल के कांगड़ा पहुंच गई।
कांगड़ा में पुलिस ने उसे मानसिक तौर पर अस्वस्थ समझ लिया और टांडा अस्पताल में भर्ती करवा दिया। सिर्फ कन्नड़ बोल पाने के कारण यहां युवती की बात न तो पुलिस वाले समझ पाए न ही चिकित्सक तथा उसे बीमार करार दे दिया।
इसके बाद डॉक्टरों ने उसे कांगड़ा से शिमला के बालूगंज स्थित हिमाचल प्रदेश सरकार के मानसिक रोग व पुनर्वास केंद्र में भेज दिया। इसके बाद युवती का घर-बार पता करने के प्रयास शुरू हुए और अंतत: उसे उसका परिवार मिल गया।