
अनंत मिश्रा
बेंगलूरु. सदियों पहले हरियाणा के कुरु क्षेत्र में सिंहासन पाने के लिए एक युद्ध लड़ा गया था, जिसे महाभारत की संज्ञा दी गई। अठारह दिन चला यह युद्ध इतनी शालीनता और मर्यादा के साथ लड़ा गया कि इस आज तक धर्म युद्ध के रूप में याद किया जाता है। इन दिनों देश के दक्षिणी राज्य कर्नाटक में भी सिंहासन पाने के लिए एक युद्ध लड़ा जा रहा है।
अंतर इतना है कि कुरु क्षेत्र की मर्यादा और शालीनता का स्थान यहां साम-दाम-दंड और भेद ने ले लिया है। विधान सभा चुनाव की सत्ता पाने के लिए बड़े से बड़े नेता मर्यादा की लक्ष्मण रेखा को लांघने में पीछे नहीं रह रहे हैं।
विधानसभा चुनाव जीतने के लिए प्रमुख दावेदार कांग्रेस, भाजपा और जनता दल (ध) धुंआधार रैलियां और सभाएं कर रहे हैं। लेकिन खास बात यह कि इन सभाओं में मुद्दे गायब हैं। न चर्चा बिजली-पानी और सड़क की हो रही है और न आत्म हत्या करते किसानों की हालत सुधारने की। कुछ हो रहा है तो वे हैं वार, प्रहार और पलटवार। मोदी और राहुल एक-दूसरे को को चुनौती दे रहे हैं।
गुजरात चुनाव से ज्यादा तल्खी
कर्नाटक में सत्ता पाने के लिए दलों के बीच शब्दों के बाण पहले भी चलते रहे हैं। नोक-झोंक भी होती रही है और गर्मागर्मी भी। लेकिन चुनाव में यहां जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा है, उसने गुजरात के चुनाव की तल्खी को भी पीछे छोड़ दिया है। गुजरात में शुरू हुई आतंक, पाकिस्तान और पप्पू -जुमलेबाज की बात शोले के डकैतों तक पहुंच चुकी है।
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'राहुल बिना पढ़े 15 मिनट बोलकर दिखाएं।' 'जिस तरह कर्नाटक के लोग गर्मी बर्दाश्त नहीं कर सकते, वैसे ही कांग्रेस को भी बर्दाश्त नहीं करेंगे'।
- नरेन्द्र मोदी , प्रधानमंत्री
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'कर्नाटक में भाजपा की टीम में गब्बरसिंह, सांभा और कालिया जी जुड़ गए हैं। भाजपा रेड्डी बंधुओं की गैंग को भी विधान सभा में भेजने की तैयारी कर रहे हैं'।
- राहुल गांधी , अध्यक्ष कांग्रेस
Published on:
06 May 2018 08:09 pm
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