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सर्व सुखकर है परमेष्ठि की भक्ति

दूसरा कुछ करने लायक है वह भी उनकी भक्ति की पुष्टि के लिए ही है

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सर्व सुखकर है परमेष्ठि की भक्ति

बेंगलूरु. सर्व सुखकर है परमेष्ठि की भक्तिशांतिनगर जैन श्वेताम्बर संघ में आचार्य महेन्द्रसागर ने बुधवार को प्रवचन में कहा कि सुख पाने और दुख टालने के लिए प्रयास कर रहे संसारीजन अपने सुख के लिए किसी को भी दुख देते हुए यह सोचते नहीं, स्वयं तो दुख से दूर-दूर भागते रहते हैं और सुख की आशा में दुखों को ही बोते चले जाते हैं।

जिन्हें सुख पाना है उन्हें परमेष्ठि भगवंतों की भक्ति छोड़कर कुछ भी करने जैसा नहीं है। मनुष्य जन्म में कुछ करने को है तो वह भी पंचपरमेष्ठि की भक्ति ही है। दूसरा कुछ करने लायक है वह भी उनकी भक्ति की पुष्टि के लिए ही है। उन्होंने कहा कि परमेष्ठि की भक्ति सर्व दुख हर और सर्व सुखकर है। पांच विषयों के राग से राग बढ़ता है, परिणाम दुख मिलता है। पंचपरमेष्ठि से राग होने से राग का नाश होता है और पूर्ण सुख की प्राप्ति होती है।


माधवनगर में सिद्धचक्र महापूजन संपन्न
बेंगलूरु. माधवनगर के वासूपूज्य जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक संघ के तत्वावधान में साध्वी अनंतपद्मा की निश्रा में आसोज मास की नवपद ओली के आलंबन में बुधवार को सिद्धचक्र महापूजन संपन्न हुआ। इस पूजन का लाभ संघवी बस्तीमल सुरेशकुमार मरलेचा परिवार ने लिया। विधिविधान जसवंत गुरू ने कराया।


ज्ञानशाला प्रशिक्षक प्रशिक्षण शिविर
बेंगलूरु. विजयनगर स्थित अर्हम् भवन में सभा के तत्वावधान मे साध्वी मधुस्मिता ठाणा 6 के सान्निध्य में तीन दिवसीय ज्ञानशाला प्रशिक्षक प्रशिक्षण शिविर प्रारम्भ हुआ, जिसमें ज्ञानशाला प्राध्यापक व उपासक श्रेणी के राष्ट्रीय संयोजक डालमचन्द नौलखा प्रशिक्षण प्रदान करेंगे। अध्यक्ष बंशीलाल पितलिया ने स्वागत किया।

ज्ञानशाला संयोजिका मधु कटारिया ने शिविर के विषय में जानकारी दी। कर्नाटक प्रांत के ज्ञानशाला प्रभारी माणक चंद संचेती ने विचार रखे। ज्ञानशाला प्राध्यापक डालमचन्द नौलखा ने कहा कि बहनें अपने ज्ञान का विकास करें तथा इसे अपने जीवन मे भी उतारें। साध्वी मधुस्मिता ने उपासक श्रेणी के राष्ट्रीय संयोजक डालमचन्द नौलखा की सराहना की।

उन्होंने कहा कि वे गृहस्थ होते हुए भी वर्ष भर में करीब दस महीनों का समय जैन धर्म के सिद्धांतों, तेरापंथ की मान्यताओं व धारणाओं के बारे मे समझाकर धर्म संघ की सेवा में अपना समय लगा रहे हैं। शिविर में ज्ञानशाला प्रशिक्षिकाओं तथा उपासिकाओं को प्रेरणा देने हुए साध्वी ने कहा कि वे इस शिविर द्वारा अधिक से अधिक लाभान्वित हों। शिविर में करीब 30 महिलाएं संभागी बनीं।