
आरोप : 'अनाथ' बना सार्वजनिक शिक्षा विभाग
बेंगलूरु. सार्वजनिक शिक्षा विभाग की अनदेखी से शिक्षा संस्थाओं का अनुदान, शिक्षकों की तबादला नीति जैसी कई समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है।
2018-19 शिक्षा वर्ष में शिक्षकों के तबादलों को लेकर पूरे राज्य में अफरा-तफरी का माहौल है। शिक्षा वर्ष से पहले ही तबादलों को लेकर शिक्षकों के सड़कों पर उतरने की नौबत आ गई है।
भाजपा के विधान परिषद सदस्य अरूण शाहपुर ने यह बात कही। यहां शुक्रवार को उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री एच.डी. कुमारस्वामी स्वयं इस विभाग को संभाल रहे हैं।
जबकि कांग्रेस तथा जद (एस) में इसे संभालने में सक्षम कई विधायक हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री का शिक्षा विभाग अपने पास रखना तार्किक नहीं है।
मुख्यमंत्री के पास कई विभाग होने से मुख्यमंत्री प्राथमिक तथा माध्यमिक शिक्षा विभाग पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे पा रहे हैं। जिसके परिणाम स्वरूप यह विभाग अनाथ हो गया है।
उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा विभाग में प्रभारी निदेशक नियुक्त किया गया है। दो माह पहले जब इस मामले को लेकर शिक्षक मतदाता क्षेत्र से चयनित विधान परिषद सदस्यों ने उच्च शिक्षा मंत्री जी.टी.देवेगौड़ा के साथ विचार-विमर्श किया, तब मंत्री ने मुख्यमंत्री से बातचीत कर पूर्णकालिक निदेशक की नियुक्ति करने का आश्वासन दिया था लेकिन आज तक इसे पूरा करने में विफल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि नए विश्वविद्यालयों को लेकर गठबंधन सरकार की नीति ज्ञात नहीं है।
व्याख्याता तथा सहायक व्याख्याताओं के कई पद वर्षों से रिक्त होने के कारण विद्यार्थियों का नुकसान हो रहा है। लेकिन सरकार शिक्षा विभाग पर ध्यान नहीं दे रही।
Published on:
17 Nov 2018 08:25 pm
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