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गुरुओं का सदैव आदर व सम्मान करें

बेंगलूरु. कुंथुनाथ जिनालय, श्रीनगर में विराजित आचार्य चंद्रयश सूरीश्वर से धर्मसभा में कहा कि जिनशासन की प्राप्ति परम पुण्योदय से हुई है। ऐसे जिनशासन का संचालन करने का दायित्व प्रभु के विरह में आचार्यों को दिया गया है। इसलिए तीर्थंकर परमात्मा के अभाव में तीर्थंकर तुल्य आचार्यों को माना है। आचार्य ने कहा कि गुरुओं […]

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बेंगलूरु. कुंथुनाथ जिनालय, श्रीनगर में विराजित आचार्य चंद्रयश सूरीश्वर से धर्मसभा में कहा कि जिनशासन की प्राप्ति परम पुण्योदय से हुई है। ऐसे जिनशासन का संचालन करने का दायित्व प्रभु के विरह में आचार्यों को दिया गया है। इसलिए तीर्थंकर परमात्मा के अभाव में तीर्थंकर तुल्य आचार्यों को माना है। आचार्य ने कहा कि गुरुओं का सदैव आदर व सम्मान करना चाहिए। गुरु के मार्गदर्शन में किए कार्यों से विशेष सिद्धि की प्राप्ति हो सकती है। आचार्य के सान्निध्य में 22 फरवरी से आयोजित होने वाले जिनालय के रजत जयंती उत्सव पर चर्चा की गई और महोत्सव को भव्य बनाने पर विचार-विमर्श किया गया।