7 फ़रवरी 2026,

शनिवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

आनंद ऋषि जैन संत ही नहीं जन-जन के संत थे

धर्मसभा का आयोजन

less than 1 minute read
Google source verification
आनंद ऋषि जैन संत ही नहीं जन-जन के संत थे

आनंद ऋषि जैन संत ही नहीं जन-जन के संत थे

बेंगलूरु. श्वेताम्बर स्थानकवासी बावीस संप्रदाय जैन संघ ट्रस्ट में विराजित साध्वी डॉ. रुचिकाश्री, साध्वी पुनितज्योति, जिनाज्ञाश्री के सान्निध्य में रविवार सुबह गुरु गणेश बाग में आनंद ऋषि की 121 वीं जयंती, उपाध्याय केवल मुनि की 110 वीं जयंती, साध्वी चारित्रप्रभा की 73वीं जयंती, साध्वी गौरव, डॉ. रुचिकाश्री की 62 वीं जयंती पर विशेष धर्मसभा हुई। डॉ. रुचिकाश्री ने कहा कि आचार्य आनंद ऋषि जैन संत ही नहीं जन जन के संत थे। उनका जीवन ज्ञान-ध्यान के साथ-साथ अनेक महान सद्गुणों की खान था। जो भी आचार्य भगवंत के सान्निध्य प्राप्त कर लेता अपने जीवन में आने वाले दुख, कष्ट और संकट दूर हो जाते थे। साध्वी डॉ. रुचिकाश्री ने अपने गुरुवर्या चारित्रप्रभा के आज जन्म दिवस पर कृतज्ञता अर्पित करते हुए कहा कि आज जो भी वह है वो गुरु को जाता है जिन्होंने उन्हें ज्ञान ध्यान एवं जिनशासन की सेवा करने का अवसर उन्हें साध्वी के रूप में उन्हें उपलब्ध करवाया। साध्वी जिनाज्ञाश्री ने अपने मधुर स्वर से सुन्दर गीतिका के माध्यम से सभी महापुरुषों के प्रति गुणानुवाद किया। साध्वी ने कहा कि जयंती शब्द के अनेकों स्वरूप हैं, पर एक अर्थ में यह शब्द अपनी सार्थकता को शुभता स्वरूप में ही दर्शाता है। साध्वी पुनीत ज्योति ने भी इस अवसर पर सभी महापुरुषों के प्रति अपने उद्गार व्यक्त किए।
संघ द्वारा आयोजित तीन दिवसीय कार्यक्रम का आज तीसरे दिन गुणानुवाद विशेष है। पहला दिवस सामायिक दिवस, दूसरा दिवस आयम्बिल दिवस के रूप में हम श्रद्धालुओं ने इन महापुरुषों को तप त्याग से अपनी भेंट दी है। सोनल सिंघवी ने जयंती के अवसर पर भक्ति गीत प्रस्तुति की। गणेश बाग संघ के अध्यक्ष लालचंद मांडोत ने सभी का स्वागत किया।