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आचार संहिता के कारण नहीं हुई राज्योत्सव पुरस्कारों की घोषणा

अब लोस और विस उपचुनावों के बाद होगा पुरस्कार वितरण

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आचार संहिता के कारण नहीं हुई राज्योत्सव पुरस्कारों की घोषणा

बेंगलूरु. राज्य के गठन के उपलक्ष्य में 63वां कन्नड़ राज्योत्सव गुरुवार को मनाया जाएगा। हालांकि, इस बार राज्योत्सव के मौके पर राज्योत्सव पुरस्कारों का वितरण नहीं होगा। राज्य सरकार ने आदर्श आचार संहिता लागू होने के कारण गुरुवार को राज्योत्सव के मौके पर होने वाले राज्योत्सव पुरस्कार वितरण समारोह को स्थगित करने का निर्णय लिया है।

राज्य में तीन लोकसभा और दो विधानसभा सीटों के लिए होने वाले उपचुनाव के कारण आचार संहिता लागू है। हालांकि, दोपहर में राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी संजीव कुमार ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा था कि उपचुनाव कुछ सीमित सीटों पर हो रहे हैं लिहाजा आयोग को राज्योत्सव समारोह के आयोजन पर कोई आपत्ति नहीं है। राज्योत्सव पुरस्कार वितरण के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा था कि अभी आयोग को इसके बारे में राज्य सरकार से कोई आग्रह नहीं मिला है।

इससे पहले मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी ने बुधवार सुबह 10.30 बजे राज्योत्सव पुरस्करों की सूची को अंतिम रूप देने के लिए उच्च स्तरीय समिति की बैठक बुलाई थी लेकिन आचार संहिता के कारण बैठक स्थगित कर दी गई।

शाम में कुमारस्वामी ने मुख्यमंत्री के आधिकारिक हैंडल से ट्वीट कर राज्योत्सव पुरस्कार वितरण समारोह स्थगित किए जाने की जानकारी दी। कुमारस्वामी ने ट्वीट में कहा कि लोकसभा और विधानसभा उपचुनावों के कारण राज्योत्सव पुरस्कार समारोह स्थगित कर दिया गया है। उपचुनाव की प्रक्रिया पूरी होने के बाद राज्योत्सव पुरस्कारों का वितरण होगा।

उपचुनाव के तहत शिवमोग्गा, मण्ड्या व बल्लारी लोकसभा क्षेत्रों के अलावा रामनगर व जमखंडी विधानसभा क्षेत्रों में 3 नवम्बर को मतदान होना है और 6 नवम्बर को मतगणना होगी। राज्य के सात जिलों-मण्ड्या, रामनगर, शिवमोग्गा, बल्लारी, बागलकोट, मैसूरु और उडुपी जिले में आचार संहिता लागू है। सचिवालय के सूत्रों का कहना है कि 6 नवम्बर के बाद उच्च स्तरीय समिति की बैठक आहूत कर पुरस्कार से सम्मानित किए जाने वाले लोगों की सूची को अंतिम रूप दिया जाएगा।

गौरतलब है कि 1966 से दिया जाने वाला राज्योत्सव पुरस्कार कर्नाटक रत्न के बाद राज्य का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। राज्योत्सव पुरस्कार कला, साहित्य, खेल, विज्ञान, शिक्षा, चिकित्सा, समाजसेवा सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान वालों को दिया जाता है।

पहले इन पुरस्कारों की संख्या तय नहीं थी लेकिन कुछ साल पहले सरकार ने अदालत के दखल के बाद मानकों के साथ पुरस्कारों की संख्या भी तय की थी। अब हर साल राज्योत्सव वर्षगांठ की संख्या के हिसाब से ही पुरस्कारों की संख्या भी होगी।

इस साल 63 वें राज्योत्सव पर 63 लोगों को सम्मानित किया जाना है। हालांकि, कन्नड़ व संस्कृति विभाग को 200 से ज्यादा आवेदन मिले हैं। खेल को छोड़कर अन्य वर्गों के आवेदकों के लिए न्यूनतम 60 साल की आयु की शर्त लगाई गई है।

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