21 जनवरी 2026,

बुधवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

उपकर के विरोध में कृषि उपज बाजार समिति का आक्रोश

राज्यव्यापी हड़ताल की चेतावनी

less than 1 minute read
Google source verification
उपकर के विरोध में कृषि उपज बाजार समिति का आक्रोश

उपकर के विरोध में कृषि उपज बाजार समिति का आक्रोश

बेंगलूरु. कृषि उपज बाजार समिति के कारोबार पर 1.5 फीसदी उपकर (सेस) में कटौती की मांग को लेकर अगले माह राज्य की 160 कृषि उपज बाजार समिति (एपीएमसी) ने मंडियां बंद करने की चेतावनी दी गई है।एपीएमसी की इस मांग के समर्थन में राज्य में दलहन तथा तिलहनों की मंडिया तथा धान की मिल भी बंद करने की चेतावनी दी गई है। एपीएमसी ने सेस को घटाकर 0.2 फीसदी करने की मांग की है।

जबकि राज्य सरकार ने इसे 1.5 से 1 फीसदी करने का फैसला किया है। लेकिन इस कटौती के बाद भी पहले की तरह विपणन शुल्क वसूले जाने से दुकानदारों को कोई राहत नहीं मिली है। एपीएमसी राज्य सरकार के फैसले से संतुष्ट नहीं है।एपीएमसी के अध्यक्ष रमेशचंद्र लाहौटी के अनुसार इस हड़ताल को लेकर 23 जुलाई को फेडरेशन ऑफ कर्नाटक चैंबर ऑफ कॉमर्स एन्ड इंडस्ट्रीज के सभागार में बैठक आयोजित की गई है। इस बैठक में हड़ताल कब करनी है इसका फैसला किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि केंद्र तथा राज्य सरकार जाहे जितने कृषि उपज मंडियां स्थापित करें कृषि उपज बाजार समितियों को इस बात पर कोई ऐतराज नहीं है। लेकिन कृषि उपजों की खरीदी करने वाले कार्पोरेट क्षेत्र के लिए एक कानून तथा एपीएमसी के लिए अलग कानून मंजूर नहीं है।

केंद्र सरकार की नीति के अनुसार कार्पोरेट क्षेत्र वाले जब कृषि उपज खरीदते तथा बेचते हैं तो उन्हें कोई उपकर नहीं चुकाना पड़ता है इसके विपरित एमपीएमसी को कृषि उपज खरीदने पर 1.5 फीसदी सेस देना पड़ता है। एपीएमसी चाहती है कि दोनों क्षेत्र के लिए समान नीति हो। कार्पोरेट क्षेत्र को सेस कर से छूट देकर केवल एपीएमसी के लिए सेस कर के भुगतान के लिए मजबूर करना यह कहां का इंसाफ है?