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हृदय रोग समेत कई घातक रोगों के इलाज में कारगर साबित होंगे कृत्रिम एंजाइम

जी.मुगेश के नेतृत्व में आइआइएससी के वैज्ञानिक जुटे अनुसंधान में

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हृदय रोग समेत कई घातक रोगों के इलाज में कारगर साबित होंगे कृत्रिम एंजाइम

हृदय रोग समेत कई घातक रोगों के इलाज में कारगर साबित होंगे कृत्रिम एंजाइम

बेंगलूरु.
भारतीय विज्ञान संस्थान (आइआइएससी) की प्रयोगशालाओं में कुछ ऐसे कृत्रिम एंजाइम तैयार करने के लिए अनुसंधान हो रहे हैं जो हृदय रोग जैसी घातक तथा कई अन्य असाध्य बीमारियों के इलाज में कारगर साबित होंगे।
प्रतिष्ठित इंफोसिस साइंस पुरस्कार के लिए चयनित प्रोफेसर जी.मुगेश और उनकी टीम एक विशेष प्रकार के रेडॉक्स एंजाइम विकसित करने में जुटी हुई है। रेडॉक्स एंजाइम भविष्य में हृदय रोग, कैंसर, अल्जाइमर, पार्किसंस और जल्द बुढ़ापा जैसी बीमारियों के इलाज में मील का पत्थर साबित होगा।
कुदरती एंजाइम की तरह करेंगे काम
पत्रिका के साथ विशेष बातचीत में प्रोफेसर मुगेश ने कहा कि कृत्रिम एंजाइम ङ्क्षसथेटिक प्रोटीन अथवा अत्यंत छोटे अणु हैं जो कुदरती एंजाइम की तरह ही काम करेंगे। हालांकि, इसकी अवधारणा विश्व में काफी पहले विकसित हुई और विभिन्न बीमारियों के इलाज में इसे कारगर भी माना गया है। लेकिन, अभी तक कृत्रिम एंजाइम की रासायनिक प्रक्रियाओं का ही अध्ययन हुआ है। दवा निर्माण में उसका अनुप्रयोग नहीं हुआ है। आने वाले कुछ वर्षों में दवाओं के उत्पादन में इसका उपयोग होने लगेगा। रसायनिक प्रयोगशाला में तैयार ये एंजाइम दवाओं के माध्यम से मानव शरीर में पहुंचकर क्षतिग्रस्त कोशिकाओं को ठीक कर देंगे जिससेजैव प्रक्रियाएं सुचारू हो जाएंगी और कई बीमारियों का कारगर इलाज हो सकेगा।
पूरक के तौर पर होगा इस्तेमाल
उन्होंने बताया कि हमारे शरीर में अनेक एंजाइम हैं जो महत्वपूर्ण जैविक प्रक्रियाओं को अंजाम देते हैं। लेकिन, जब हृदय रोग, डायबिटीज अथवा कोई बीमारी होती है तो जैविक प्रक्रियाओं से जुड़े एंजाइम प्रभावित होते हैं। ऐसी परिस्थिति में कृत्रिम एंजाइम पूरक के तौर पर कोशिकाओं में पहुंचाया जा सकता हैै। कई बीमारियों की शुरुआत कुछ एंजाइम्स में गड़बड़ी के कारण होती हैं।
हृदय रोग के इलाज में कारगर होगा रेडॉक्स एंजाइम
उन्होंने बताया कि उनकी टीम का ध्यान मुख्य रूप से रेडॉक्स एंजाइम विकसित पर है जो शरीर में ऑक्सीजन के उपापचय को नियंत्रित करेगा। मानव शरीर में जीवित कोशिकाएं श्वसन के दौरान ऑक्सीजन के आणविक उत्पाद के तौर पर रिएक्टिव ऑक्सीजन स्पीशीज (आरओएस) लगातार बनाती हैं। आरओएस की अत्यधिक मात्रा ऑक्सीडेटिव तनाव को जन्म देती है जो कोशिकाओं को नुकसान पहुचातीं हैं। इससे प्रोटीन, डीएनए या लिपिड के जैविक अणु नष्ट होने लगते हैं। यह हृदय रोग, कैंसर और उम्र्र बढऩे जैसी बीमारियों का कारण बनता है। मुगेश की टीम द्वारा डिजाइन किया गया रेडॉक्स एंजाइम इस प्रक्रिया को दुरुस्त करेगा।
नैनोजाइम्स से दूर होगी विषाक्तता
इसके अलावा टीम नैनोजाइम्स भी विकसित कर रही है जो वातावरण से सहज रूप से सहज रूप में ग्रहण किए जाने वाले विषैले तत्वों को निष्प्रभावी करेगा। इसमें नैनो मैटेरियल का उपयोग हो रहा है। मुगेश ने बताया कि मानव शरीर पर ये एंजाइम असल में किस तरह काम करते हैं इसके लिए अभी चिकित्सकीय परीक्षण होने हैं। इसमें वक्त लगेगा। यह कई चरणों में पूरा होगा जो कि एक बड़ी चुनौती है। मुगेश को इस मौलिक अनुसंधान के लिए इस वर्ष के प्रतिष्ठित इंफोसिस साइंस पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।