
फ्यूल स्टेशनों पर ऑटो की लंबी कतारें आम
एलपीजी Liquefied Petroleum Gas (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) की बढ़ती कीमतों और आपूर्ति संकट ने शहर Bengaluru की परिवहन व्यवस्था को गंभीर चुनौती के सामने खड़ा कर दिया है। इस दोहरी मार का असर एक ओर ऑटो चालकों की रोजी-रोटी पर पड़ रहा है, तो दूसरी ओर यात्रियों को लंबा इंतजार और बढ़ते किराए का सामना करना पड़ रहा है। यदि स्थिति पर जल्द नियंत्रण नहीं पाया गया, तो आने वाले दिनों में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था और अधिक प्रभावित हो सकती है।
एलपीजी की कमी के कारण दूसरे दिन भी शहर के कई हिस्सों में ऑटोरिक्शा संचालन बाधित रहा। देर रात तक भी फ्यूल स्टेशनों पर ऑटो की लंबी कतारें आम हो गई हैं। ऑटो चालकों की आम शिकायत अब गंभीर समस्या बनती जा रही है। इनका कहना है कि वे यात्रियों को सेवा देने से ज्यादा समय गैस स्टेशनों की लंबी लाइनों में बिता रहे हैं। कमाई पर गंभीर असर पड़ा है। यात्री भी परेशान हैं। कई स्थानों पर कतारें एक से दो किलोमीटर तक लंबी देखी गई हैं, जबकि कुछ पंपों पर नो स्टॉक की स्थिति भी सामने आई है।
ऑटो चालकों का कहना है कि उन्हें एक दिन में 3-4 फ्यूल स्टेशनों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, तब कहीं जाकर ईंधन मिलता है। इसके बावजूद उन्हें लंबे समय तक लाइन में खड़ा रहना पड़ता है।
राज्य Karnataka में कुल 72 ऑटो एलपीजी डिस्पेंसिंग स्टेशन (एएलडीएस) संचालित हैं, जिनमें से 31 केवल बेंगलूरु में स्थित हैं। खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामले विभाग द्वारा पहले सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों के माध्यम से प्रतिदिन 57.6 मीट्रिक टन एलपीजी की आपूर्ति की जा रही थी। हालांकि, अमरीका-इजराइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष के बाद इस आपूर्ति को बढ़ाकर 64.9 मीट्रिक टन प्रतिदिन कर दिया गया है।इसके बावजूद संभावित ईंधन संकट को लेकर फैली घबराहट और बढ़ती जा रही है। एलपीजी की उपलब्धता इतनी कम हो गई कि बेंगलूरु के कई एलपीजी स्टेशनों को पूरी तरह स्टॉक खत्म होने के कारण बंद करना पड़ा। वहीं, बेंगलूरु पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बालाजी राव ने स्पष्ट किया कि शहर में पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति सामान्य बनी हुई है और इनका संचालन बिना किसी बाधा के जारी है।
निजी एलपीजी LPG आपूर्तिकर्ताओं के पास जहां कुछ हद तक स्टॉक उपलब्ध था, वहीं उन्होंने सरकारी दरों की तुलना में कीमतों में करीब 15 रुपए प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की है। आदर्श ऑटो एंड टैक्सी ड्राइवर्स यूनियन के अध्यक्ष एम. मंजनाथ ने कहा, ऑटो चालक बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। उनमें से अधिकांश आर्थिक रूप से कमजोर हैं और लगभग 105 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच चुकी ईंधन कीमतों का बोझ उठाना उनके लिए संभव नहीं है।
एलपीजी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के चलते लगातार दूसरे दिन शहर की सडक़ों पर ऑटो रिक्शा की संख्या में स्पष्ट गिरावट देखी गई। खासकर किराए पर ऑटो चलाने वाले कई चालकों को सेवाएं बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ा।
किराए पर ऑटो चलाने वाले चालक आमतौर पर प्रतिदिन 300 से 350 रुपए तक किराया देते हैं। लेकिन एलपीजी की कीमतों में उछाल के कारण उनका दैनिक खर्च काफी बढ़ गया है, जिससे काम जारी रखना आर्थिक रूप से मुश्किल हो गया है।
आदर्श ऑटो ड्राइवर्स यूनियन के महासचिव सी. संपत के अनुसार, अब चालकों को केवल एलपीजी पर ही 450 से 550 प्रतिदिन खर्च करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा, एलपीजी की कीमतें इतनी बढ़ गई हैं कि किराए पर ऑटो चलाने वाले चालक एक दिन भी गुजारा नहीं कर पा रहे। वे किराया और गैस पर जितना खर्च कर रहे हैं, उतनी कमाई नहीं हो रही।उन्होंने बताया कि यूनियन के 14,000 सदस्यों में से करीब 10 प्रतिशत चालकों ने बुधवार से ही काम बंद कर दिया, और यदि कीमतें ऊंची रहीं तो यह संख्या और बढ़ सकती है।
आर्थिक दबाव के चलते कई चालक अब अन्य रोजगार के विकल्प तलाश रहे हैं। ऑटो चालक एम. पाशा ने कहा, मैं किराए पर ऑटो चलाता हूं। कई दिनों से बिना मुनाफे के काम कर रहा हूं। नुकसान उठाने से बेहतर है कि कुछ समय के लिए काम बंद कर दूं। अब मैं अपने भाई के रेस्टोरेंट में पार्ट-टाइम काम करने की योजना बना रहा हूं।"
ऑटो Auto की संख्या घटने से यात्रियों को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई लोगों ने बताया कि एग्रीगेटर ऐप्स पर ऑटो बुक करने में 30 से 40 मिनट तक इंतजार करना पड़ रहा है।
ऐसी स्थिति में कई यात्री अब बाइक टैक्सी का सहारा ले रहे हैं, जो अपेक्षाकृत आसानी से उपलब्ध और सस्ती साबित हो रही हैं। एक यात्री आयुषी ने कहा, लंबे समय तक ऑटो नहीं मिलने के बाद अब मैं बाइक टैक्सी का उपयोग कर रही हूं। यह सस्ती भी है और जल्दी मिल जाती है। कुछ यात्रियों ने यह भी बताया कि पीक आवर्स में ऑटो बुक करने के लिए 50 रुपए से अधिक अतिरिक्त टिप देनी पड़ रही है।
Published on:
03 Apr 2026 08:02 pm
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