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त्योहारों और जुलूसों में डीजे, साउंड सिस्टम पर बैन उचित: हाई कोर्ट

यह याचिका चामराजपेट स्थित कर्नाटक लाइट म्यूजिक एंड कल्चरल आर्टिस्ट्स एसोसिएशन के पदाधिकारी शंकर ने दायर की थी। शंकर का तर्क था कि यह आदेश सांस्कृतिक कलाकारों के लिए अनुचित है, क्योंकि वे अपने कार्यक्रमों के लिए ध्वनि उपकरणों पर निर्भर हैं।

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कर्नाटक उच्च न्यायालय Karnataka High Court ने बेंगलूरु पुलिस Bengaluru Police के उस परिपत्र को बरकरार रखा है, जिसमें गौरी-गणेश उत्सव, ईद-मिलाद जुलूस Gauri-Ganesh festival, Eid-Milad procession और अन्य सार्वजनिक समारोहों के दौरान डीजे और तेज ध्वनि प्रणालियों के उपयोग पर प्रतिबंध Restrictions on the use of DJs and loud sound systems लगाया गया था। अदालत ने स्पष्ट किया कि तय ध्वनि प्रदूषण Noise Pollution की सीमा से समझौता नहीं किया जा सकता और यह कदम शांति व जन स्वास्थ्य के हित में उचित है।


यह याचिका चामराजपेट स्थित कर्नाटक लाइट म्यूजिक एंड कल्चरल आर्टिस्ट्स एसोसिएशन के पदाधिकारी शंकर ने दायर की थी। शंकर का तर्क था कि यह आदेश सांस्कृतिक कलाकारों के लिए अनुचित है, क्योंकि वे अपने कार्यक्रमों के लिए ध्वनि उपकरणों पर निर्भर हैं।


मुख्य न्यायाधीश विभु बाखरू की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि बेंगलूरु पुलिस के पश्चिम संभाग के संयुक्त आयुक्त की जारी परिपत्र में कोई कानूनी खामी नहीं है। अदालत ने याद दिलाया कि ध्वनि प्रदूषण नियमों के तहत आवासीय क्षेत्रों में दिन में 55 डेसिबल और रात में 45 डेसिबल से अधिक ध्वनि की अनुमति नहीं है। ऐसे में उच्च-ध्वनि वाले डीजे और साउंड सिस्टम का औचित्य सिद्ध नहीं किया जा सकता।

याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया था कि पूर्ण प्रतिबंध लगाने के बजाय अधिकारियों को ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम, 2000 के अनुरूप स्पष्ट दिशानिर्देश जारी करने चाहिए थे। उन्होंने इसे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया।
हालांकि, अदालत ने इन तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि प्रतिबंध नागरिकों को अत्यधिक ध्वनि प्रदूषण के दुष्प्रभावों से बचाने का एक जरूरी कदम है। इसके साथ ही अदालत ने बेंगलूरु पुलिस का परिपत्र लागू रहने देने का आदेश दिया।