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बेंगलूरु उपनगरीय रेल : 452 किमी तक फैला होगा दूसरा चरण

- राज्‍य सरकार ने मांगी रेल मंत्रालय से मंजूरी

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बेंगलूरु. बेंगलूरु उपनगरीय रेल परियोजना (बीएसआरपी) की निष्पादन एजेंसी, कर्नाटक रेल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कंपनी (के-राइड) ने बेंगलूरु के आसपास के शहरों और कस्बों में नेटवर्क का विस्तार करने का प्रस्ताव तैयार किया है। के-राइड ने केंद्रीय रेल मंत्रालय से इसका पूर्व-व्यवहार्यता अध्ययन करने की मंजूरी भी मांगी है।

प्रस्ताव के अनुसार, उपनगरीय रेल को देवनहल्ली से कोलार (107 किमी), चिक्‍कबानावर से तुमकूरु वाया डबासपेट (55 किमी), केंगेरी से मैसूरु (125 किमी), वाइटफील्ड से बंगारपेट (45 किमी), हीलालिगे से होसूर (23 किमी), राजनुकुंटे से गौरीबिदनूर वाया दौड्डबल्लापुर (52 किमी) तक बढ़ाया जाएगा। इसके अतिरिक्त, चिक्काबानावर से मागड़ी (45 कि.मी.) एक नई लाइन, कॉरिडोर 2ए भी प्रस्तावित है।

राज्य के बुनियादी ढांचा विकास मंत्री एमबी पाटिल ने कहा कि उन्होंने चरण 2 के तहत बीएसआरपी नेटवर्क का विस्तार करने का फैसला किया है। उन्होंने कहा, इस विस्तार से निर्बाध आवागमन संभव होगा और क्षेत्र में औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।

अब तक, चल रही बीएसआरपी परियोजना में चार गलियारे शामिल हैं, जो कुल 148.17 किमी की लंबाई को कवर करते हैं, जिसमें शामिल हैं: 41.4-किमी सैम्पिगे लाइन (केएसआर बेंगलूरु सिटी-बेंगलूरु हवाई अड्डा- देवनहल्ली), 25-किमी मल्लिगे लाइन (बेनिगनहल्ली-चिक्काबानावार), 35.5-किमी परिजात लाइन (केंगेरी-वाइटफील्ड) और हीलालिगे और राजनुकुंटे के बीच 46.25-किमी की दूरी।

सरकार के एक बयान में कहा गया है, शहरी भूतल परिवहन निदेशालय (डीयूएलटी ) के आयुक्त ने वर्तमान बीएसआरपी नेटवर्क को हीलालिगे से चंदापुर, केंगेरी से नाडप्रभु केम्पेगौड़ा लेआउट (बीडीए), चलघट्टा तक विस्तारित करने और एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर)बनाने की प्रक्रिया शुरू करने का भी सुझाव दिया है।

बेंगलूरु की उपनगरीय रेल परियोजना चार दशकों से अधिक समय से लंबित है और 2020 में केंद्र द्वारा अनुमोदित है। लेकिन अभी तक इसके पहले चरण का काम भी ढंग से शुरू नहीं हो सका है।