20 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

बर्ड फ्लू: अब तक इंसानों में कोई मामला नहीं

चिकित्सकों ने बर्ड फ्लू से सावधान रहने की सलाह दी है। बर्ड फ्लू का एच5 एन1 वायरस पक्षियों के साथ मुर्गियों और बत्तखों को भी अपना शिकार बनाता है

2 min read
Google source verification
BIRD FLUE

बेंगलूरु. चिकित्सकों ने बर्ड फ्लू से सावधान रहने की सलाह दी है। बर्ड फ्लू का एच5 एन1 वायरस पक्षियों के साथ मुर्गियों और बत्तखों को भी अपना शिकार बनाता है। बर्ड फ्लू के अधिकतर विषाणु केवल दूसरे पक्षियों को ही अपना निशाना बनाते हैं लेकिन मनुष्यों के भी इसके शिकार होने का खतरा रहता है। देश में अब तक बर्ड फ्लू से किसी भी इंसान के संक्रमित होने का मामला सामने नहीं आया है। लेकिन चिकित्सकों ने चेताया है। बर्ड फ्लू मनुष्यों के स्वास्थ्य पर भी विषम प्रभाव डालने की क्षमता रखता है। मृत्यु दर करीब ६० फीसदी होती है।


पशुपालन व पशु चिकित्सा सेवा विभाग के निदेशक डॉ. एमटी मंजूनाथ ने बताया कि एच5एन1 विषाणु से किसी आदमी के संक्रमित होने का पहला मामला हांगकांग में 1997 में सामने आया था। लेकिन देश में अब तक ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है।


जिंदा हो या मृत, खतरनाक
राजीव गांधी छाती रोग संस्थान के पूर्व निदेशक डॉ. शशिधर बुग्गी के अनुसार बर्ड फ्लू चिकिन, टर्की, गीस और बत्तख की प्रजाति जैसे पक्षियों को सबसे ज्यादा प्रभावित करता है। बर्ड फ्लू वायरस एच५एन१ सबसे प्रसिद्ध है। यह इंसानों और पक्षियों को अधिक प्रभावित करने की क्षमता रखता है। जिससे मौत भी हो सकती है। इंसानों में यह वायरस संक्रमित मुर्गियों व अन्य पक्षियों के बेहद निकट रहने से फैलता है। संक्रमित पक्षी जिंदा हो या मृत इससे फर्क नहीं पड़ता। आंखों, मुंह और नाक के जरिए वायरस इंसानों के शरीर में पहुंच जाते हैं। समय पर उचित उपचार न हो तो इसके प्रभाव से अंगों के फेल होने का खतरा रहता है।


मिलते हैं साधारण फ्लू के लक्षण
मणिपाल अस्पताल के अध्यक्ष डॉ. सुदर्शन बल्लाल ने बताया कि मांस अगर सही ढंग से नहीं पका हो तो उसे खाने वाला भी बीमार हो सकता है। अधपका मांस या अंडा नहीं खाएं। इसके अलावा फ्रोजन मांस से दूर रहें क्योंकि एच5 एन1 वायरस लंबे समय तक जिंदा रहते हैं। मनुष्यों में साधारण फ्लू के लक्षण बर्ड फ्लू से मिलते हैं। इसमें सांस लेने में दिक्कत, तेज बुखार, जुकाम और नाक से पानी बहने के लक्षण हैं। ऐसा होने पर अलावा सात दिनों तक लगातार शरीर का तापमान जांचें। अगर तापमान कई ३७.3 डिग्री सेलसियस से अधिक हो तो चिकित्सक को दिखाएं। संक्रमित मनुष्य से दूसरे मनुष्य का संक्रमित होना दुर्लभ है। फिलहाल इसका कोई टीका नहीं है।

इनका रखें ख्याल
मृत या बीमार पक्षियों को बच्चे से दूर रखें,
संक्रमित मरीज के पास दस्ताना और मास्क पहन कर जाएं,
संक्रमित मरीज से बात करते समय दूरी बनाए रखें,
मुर्गियों के सीधे सम्पर्क में नहीं आएं, दस्ताना और मास्क का प्रयोग करें,
पक्षियों के पंख और म्यूकस से दूर रहे, छुए जाने की स्थिति में साबुन से अच्छी तरह से हाथ धोएं,
फ्रोजन मांस से दूर रहें, ठीक से पके हुए चिकन या अंडा खाने में खतरा नहीं,
तालाब, कुएं, नदी का पानी कभी कभी पक्षियों के मल या पंख या म्यूकस के कारण संक्रमित हो जाता है। इनमें नहाने से बचें, पानी को अच्छी तरह से उबाल कर पिएं।