Bengaluru के दर्जनों स्कूलों को इस माह के आरंभ में Bomb की धमकी वाले ईमेल मिलने की घटना के परिप्रेक्ष्य में स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग (डीएसइएल) ने सभी स्कूलों को एहतियाती कदम उठाने के लिए परिपत्र जारी किया है। बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उपाय बताए हैं। परिपत्र के अनुसार स्कूल परिसर और उनसे जुड़े खेल के मैदानों का उपयोग केवल शैक्षिक उद्देश्यों जैसे पाठ्येतर गतिविधियों, खेल, शारीरिक शिक्षा और स्कूलों के अन्य कार्यक्रमों के लिए किया जाना चाहिए। अन्य कार्यक्रमों के लिए किराए पर नहीं दिया जाना चाहिए। परिपत्र में इस बात पर भी असंतोष व्यक्त किया गया है कि पहले के कई निर्देशों के बावजूद कई निजी स्कूल प्रबंधन इसका पालन नहीं कर रहे हैं।
परिपत्र में में आगे कहा गया है कि स्कूलों को सतर्क रहने की जरूरत है। स्कूल परिसर में या आसपास अनावश्यक रूप से घूमते हुए लोगों पर विशेष निगरानी रखें। गुमनाम फोन कॉल या पत्र मिलने की जानकारी फौरन नजदीकी पुलिस थाने को दें।
स्कूल सुरक्षा नीति की मांग
निजी स्कूल संघ इस परिपत्र से खुश नहीं हैं। इसे अपर्याप्त बताते हुए एक समर्पित स्कूल सुरक्षा नीति की मांग की है। एसोसिएटेड मैनेजमेंट ऑफ इंग्लिश मीडियम स्कूल्स इन कर्नाटक (केएएमएस) के महासचिव शशिकुमार डी. के अनुसार अदालतों, अधिवक्ताओं, अस्पतालों और चिकित्सकों को दी गई कानूनी सुरक्षा की तर्ज पर न केवल स्कूली बच्चों बल्कि उनके कर्मचारियों, प्रबंधन और संपत्ति को भी विशेष कानूनी सुरक्षा मिलनी चाहिए।
उन्होंने याद दिलाया कि जब तनवीर सेत जब शिक्षा मंत्री थे तब उन्होंने सभी स्कूल परिसरों को शून्य-सहिष्णुता क्षेत्र घोषित करने का प्रयास किया गया था, लेकिन उनके कार्यकाल के बाद प्रस्ताव को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
स्कूली बच्चों की सुरक्षा नीति लाने का आश्वासन
लगभग 70 स्कूलों को एक दिसंबर को बम की धमकी वाले ईमेल मिले थे। वर्ष 2021 में भी इसी तरह के एक प्रकरण ने अभिभावकों, स्कूल प्रबंधन व प्रशासन की नींद उड़ा दी थी। उस वर्ष 20 से अधिक स्कूलों को इसी तरह के फर्जी बम धमकी वाले ईमेल मिले थे। दोनों मामले आज तक अनसुलझे हैं। हाल के मामले को लेकर मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या व स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग मंत्री मधु बंगारप्पा विपक्ष के निशाने पर हैं। मंत्री ने स्कूली बच्चों की सुरक्षा के लिए एक नीति लाने का आश्वासन दिया है। हालांकि, सत्ता में किसी की सरकार हो, हर घटना के बाद ऐसे आश्वासन खोखले साबित हुए हैं।