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सुखी परिवार से सुखी जीवन का निर्माण-मुनि सुधाकर

मेंगलूरु जैन भवन में कार्यशाला का आयोजन

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सुखी परिवार से सुखी जीवन का निर्माण-मुनि सुधाकर

सुखी परिवार से सुखी जीवन का निर्माण-मुनि सुधाकर

बेंगलूरु. मुनि सुधाकर के सान्निध्य में मेंगलूरु स्थित जैन भवन में सुखी परिवार सुखी जीवन का निर्माण विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में मुनि ने कहा कि परिवार में स्त्री और पुरुष दोनों ही एक रथ के दो पहिए हैं। जिस तरह दोनों पहियों के बिना गाड़ी नहीं चल सकती। उसी तरह परिवार में स्त्री-पुरुष दोनों के पारस्परिक सहयोग के बिना परिवार का वातावरण भी सुखद नहीं हो सकता। सुखी परिवार से सुखी जीवन का निर्माण होता है। परिवार की सुख शांति और प्रगति में दोनों का योगदान समान भाव से होना जरूरी है। सुखी परिवारों से ही समाज भी सुखी होगा। महिलाओं में हीनता और भीरूता की ग्रंथियों से मुक्त होना होगा तभी वे अपनी जिम्मेदारियों को अच्छी तरह निभा पाएंगी।

मुनि ने कहा कि आज माताओं की जिम्मेदारियां पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई हैं। हमारे बच्चे कच्चे घड़े के समान हैं। उन्हें जैसा बनाया जाएगा वह वैसा ही बनेंगे। आधुनिक संसाधनों से बच्चों में जो कुसंस्कार बढ़ रहे हैं। उन्हें दूर करने की जिम्मेदारी महिलाओं पर विशेष रूप से हैं। इसलिए नारी समाज को बच्चों में संस्कार निर्माण की ओर विशेष ध्यान देना होगा। उन्हें बच्चों से निरंतर संवाद रखते हुए उनकी सहज जिज्ञासाओं का सही समाधान करना होगा। मुनि ने कहा परिवार का वातावरण शांत और आनंदमय होना चाहिए। जो लोग स्वार्थी और अधिकारों से ऊपर उठकर परिवार की सुख शांति और एकता के लिए त्याग करते हैं वे सच्चे अर्थ में महान हैं और समाज के आदर्श हैं। परिवार में भौतिक चकाचौंध के बजाय आध्यात्मिक वातावरण के सृजन पर ज्यादा जोर दिया जाना चाहिए। जिनका मन शांत और प्रसन्न होता है वे अपने दायित्व को ज्यादा कुशलता से निभा सकते हैं । मंगलाचरण अजीत बेंगाणी, धर्मेश भंसाली, मनीष दुगड़़ ने किया। तेजकरण सिपाणी ने सीमंधर भगवान ढाल प्रस्तुत की। अलका बैद, नीलम भंसाली, लक्ष्मीपत नाहटा, चंदनमल भटेवरा सिमोगा ने विचार व्यक्त किए।