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कैंसर जीवन का अंत नहीं: मनीषा

कैंसर जीवन का अंत नहीं है। शरीर में कुछ गड़बड़ी महसूस हो तो, चिकित्सकीय परामर्श में जरा भी देर न लगाएं।

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कैंसर जीवन का अंत नहीं: मनीषा

कैंसर जीवन का अंत नहीं: मनीषा

बेंगलूरु. कैंसर जीवन का अंत नहीं है। शरीर में कुछ गड़बड़ी महसूस हो तो, चिकित्सकीय परामर्श में जरा भी देर न लगाएं। उपचार के दौरान संघर्ष व मजबूत इच्छा शक्ति जरूरी है। यह बात कैंसर को मात देने वाली अभिनेत्री मनीषा कोइराला ने सोमवार को मणिपाल अस्पताल में कैंसर व उपचार संबंधी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और ‘कैंसर को हराया जा सकता है’ जागरूकता अभियान का उद्घाटन करने के बाद कही।


अभिनेत्री मनीषा कोइराला कैंसर से उबरने के बाद कैंसर के प्रति जागरूकता अभियान में लगीं हैं। बीमारी के दिनों को याद करते हुए उन्होंने अपने अनुभव साझा किए और कहा कि सकारात्मक दृष्टि एवं स्वस्थ जीवनशैली से हर रोग से बचा जा सकता है। उन्होंने कहा कि समय पर पहचान हो जाए तो लगभग सभी प्रकार के कैंसर का उपचार संभव है। इसके लिए जरूरत है कैंसर के लक्षणों के प्रति लोगों को जागरूक किया जाए। तंबाकू, शराब व जंक फूड कैंसर के बड़े कारक हैं।

अस्पताल के अध्यक्ष डॉ. सुदर्शन बल्लाल ने कहा कि कैंसर को हराया जा सकता है। इस अभियान के तहत ३० जिलों में कैंसर जागरूकता गतिविधियांं तेज की जाएंगी। अस्पताल ने इसके लिए सभी जिलों में बेहतर काम कर रहे गैर सरकारी संस्थानों को इस अभियान से जोड़ा है। अस्पताल ने इसके लिए विशेष टीम तैयार की है।

कैंसर टास्क फोर्स ने जारी किए नए दिशा-निर्देश

बेंगलूरु. कैंसर टास्क फोर्स ने मुंह और गले के कैंसर से निपटने के लिए भारतीय परिप्रेक्ष्य में इष्टतम उपचार व विशिष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। जो विशेषज्ञ चिकित्सक व मरीज दोनों के लिए लाभदायक होंगे। सोमवार को आयोजित टास्क फोर्स की बैठक में फोर्स की संयोजक डॉ. किरण मजूमदार शॉ ने कहा कि ओरल कैंसर के करीब एक तिहाई वैश्विक मरीज भारतीय होते हैं। ऐसे में देश में नीति-निर्माण और उपचारात्मक नवाचार की व्यापक संभावनाएं हैं।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में राष्ट्रीय कैंसर संस्थान के प्रमुख डॉ. जी. के. रथ ने कहा कि स्वास्थ्य देखभाल हर मरीज का अधिकार है। स्वास्थ्य सेवाओं को सभी के लिए सुलभ बनाने की जरूरत है। टाटा मेमोरियल अस्पताल के डॉ. कुमार प्रभाष ने कहा कि कैंसर के उपचार व प्रबंधन के लिए पश्चिमी दिशा-निर्देशों पर निर्भर न होकर भारत को अपने विशिष्ट दिशा-निर्देश विकसीत करने की जरूरत है।