
Teesta setalvad
मेंगलूरु. जो लोग धर्म के आधार पर लोगों को विभाजित कर रहे हैं, उन्हें यह याद रखना चाहिए कि स्वतंत्रता संघर्ष किसी विशेष समुदाय और धर्म द्वारा नहीं किया गया था। सभी समुदायों के लोगों ने स्वतंत्रता संग्राम के लिए अपना जीवन लगा दिया था। सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ ने रविवार को मेंगलूरु के कुत्तूर पडावू में संविधान संरक्षण समिति की ओर से आयोजित एक सम्मेलन में कहा।
उन्होंनेकेंंद्र सरकार पर कथित आरोप लगाते हुए कहा कि वैचारिक मतभेदों और असंतोष की आवाज को केंद्र सरकार बर्दाश्त नहीं कर रही है। वह ऐसी आवाज को दबाने के लिए गोली तक चला रही है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में पिछले महीने हुई हिंसा को रोकने में दिल्ली पुलिस पूरी तरह विफल रही। उन्होंने सीएए, एनआरसी और एनपीआर को लेकर विभिन्न प्रदर्शनों में शामिल लोगों को और विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों के खिलाफ होने वाली हिंसा की निंदा की।
सीएए की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि देश के लोगों की नागरिकता की पुष्टि करने के लिए दस्तावेजों के जांच की तहसीलदारों को दी गई शक्ति को वापस लेेने की जरुरत है। असम का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि इन्हीं कारणों से करोड़ों लोगों को संदिग्ध नागरिक घोषित किया जाएगा। तीस्ता ने कहा कि असम में लोग दस्तावेज होने के बाद भी नागरिकता साबित करने के लिए भटक रहे हैं। यहां तक कि बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को डिटेंसन सेंटर में भेजा रहा है।
Published on:
2 Mar 2020, 1:00 AM IST
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