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करगा उत्सव में दिखा सदियों पुराना उत्साह

धर्मराय स्वामी मंदिर में उमड़े श्रध्दालु

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बेंगलूरु. शहर का सबसे पुराना उत्सव करगा गुरुवार की रात परम्परागत उत्साह व उल्लास के साथ मनाया गया। तिगलरपेट स्थित धर्मराय स्वामी मंदिर से शुरू करगा उत्सव को करीब से देखने के लिए भारी संख्या में श्रध्दालु उमड़े। लगभग 300 साल पुराने उत्सव का जुलूस मध्य रात्रि के बाद 12.30 बजे शुरू हुआ और रात भर चला। करगा उत्सव के लिए ओटीसी रोड सहित आसपास की सड़कों पर विशेष सजावट की गई थी। तिगला समुदाय से जुड़े इस उत्सव के दौरान सिर पर करगा लेकर द्रौपदी दौड़ती रही और उसके पीछे नंगी तलवारें लेकर वीर कुमार चलते रहे। द्रौपदी की वेषभूषा में करगा ढो रहे व्यक्ति पर जगह-जगह फूल बरसाए गए। करगा महोत्सव के निर्धारित मार्ग पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।

आसपास के कई थानों में शराब की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया गया था। करगा उत्सव में सांसद डॉ. वीरेन्द्र कुमार हेग्गड़े सहित अन्य गणमान्य लोगों की भी उपस्थिति रही।

मालूम हो कि धर्मराय स्वामी मंदिर देश में पांडवों को समर्पित एकमात्र मंदिर है। करगा उत्सव प्रकृति का उत्सव है। तिगला समुदाय प्रतिवर्ष चैत्र महीने में करगा उत्सव मनाता है। यह द्रौपदी को शक्ति की देवी के रूप में सम्मान करने के लिए मनाया जाता है। करगा के दौरान द्रौपदी एक दरगाह पर भी जाती है इसलिए इसे हिन्दू-मुस्लिम एकता का भी प्रतीक माना जाता है।

मालूम हो कि करगा उत्सव शुरू होने से पहले कर्पूर आरती के दौरान आग भड़कने से 10 वाहन क्षतिग्रस्त हो गए थे।