
बेंगलूरु. राजाजीनगर के सलोत जैन आराधना भवन में धर्म प्रवचन के दौरान आचार्य देवेंद्रसागर सूरी ने कहा कि चाहत प्रबल होने पर ही सोई हुई शक्तियां जागती हैं, और मनोवांछित फल मिल जाता है।
आचार्य ने कहा कि सांसारिक इच्छाओं की पूर्ति होने पर क्षणिक संतुष्टि भले ही मिल जाए, किंतु अपेक्षाएं धरी रह जाती हैं। वैसे ही, जैसे मोटी पगार पाने वाली संतानों पर इतराते, उन्हें सर-आंखों पर रखते माता-पिता संतति द्वारा अपेक्षाओं पर पानी फेर देने से औंधे मुंह गिरते हैं।
जिंदगी से क्या चाहिए, दुनिया में किससे क्या और कितना चाहिए, इस बाबत स्पष्टता रहे, तो मोह भंग और हताशा की नौबत नहीं आएगी। इच्छाएं, आकांक्षाएं संजोते समय जान लें कि अपेक्षाओं के अनुरूप कार्य किए जाएं, तभी उनसे रस मिलेगा। उस परमपिता में अडिग आस्था के रहते जीवन की बाधाओं और कठिनाइयों से विचलित नहीं होंगे।
बेहतर होगा, प्राप्त उपहारों की सूची बनाएं। संपूर्ण स्वस्थ शरीर, परिवार जन, मित्र, आजीविका का साधन, रहने को छत, दो जून का सुनिश्चित भोजन, कुछ भी करने की अथाह सामथ्र्य। प्रभु या कहीं और से कुछ मांगने से पूर्व विचार करें, कहीं कोई व्यर्थ की वस्तु तो नहीं मांग रहे।
Published on:
08 Sept 2020 10:39 pm
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