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चातुर्मास में बढ़ते आडम्बर पर चर्चा

संभवनाथ जैन भवन में बाबूभाई मेहता की अध्यक्षता में राष्ट्रीय जैन आगम मंच की बैठक हुई। इस अवसर पर मंच पर मनुभाई उपस्थित थे।

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चातुर्मास में बढ़ते आडम्बर पर चर्चा

चातुर्मास में बढ़ते आडम्बर पर चर्चा

बेंगलूरु. संभवनाथ जैन भवन में बाबूभाई मेहता की अध्यक्षता में राष्ट्रीय जैन आगम मंच की बैठक हुई। इस अवसर पर मंच पर मनुभाई उपस्थित थे।

बैठक में मंदिर मार्गी, स्थानकवासी, तेरापंथी सभी संप्रदाय के श्रावक-श्राविकाओं ने भाग लिया। बैठक में जैन धर्म में बढ़ते शिथिलाचार पर चर्चा हुई। सांगली से आए रमेश मेहता ने चातुर्मास में बढ़ते आडम्बर को गैर जरूरी बताया। उन्होंने आगार धर्म और अणगार धर्म क्या होता है, समझाया।

बाबूलाल मेहता ने आभार जताया। बैठक में तेजराज गुलेच्छा, महेन्द्र कुमार रांका, के.के.भंसाली, दीपचंद भंसाली, रूपचंद कुमट, कुमारपाल सिसोदिया, रमेश मेहता, कैलाश, अशोक रांका, अशोक मेहता आदि उपस्थित थे।

दुख का मूल कारण चिंता : कल्पविजय
बेंगलूरु. हमारे दुख का सबसे अहम कारण है चिंता, चिंता चिता से भी भयानक है। चिता तो केवल मुर्दे को जलाती है। परंतु चिंता तो जिन्दे को तिल-तिल कर जला देती है।

जीवन को सुखी बनाने के लिए मन का शांत होना जरूरी है। इसलिए मंदिर जाना चाहिए। यह बात पन्यास प्रवर कल्पज्ञविजय ने धर्मसभा में कही। वे चेन्नई से विहार कर 15 जनवरी तक बेंगलूरु पहुंचेंगे। वे चिकपेट के दीक्षा कार्यक्रम में शामिल होंगे।