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चंद्रयान-3 का अभियान लगभग पूरा, लैंडर और रोवर को सुलाया

लैंडर और रोवर, दोनों अच्छे से काम कर रहे हैं अब उन्‍हें नींद में भेजने की प्रक्रिया शुरू हो गई है क्योंकि अब चांद के उस हिस्से में ठंडी रात होने वाली है। एक चंद्र दिवस धरती के 14 दिन के समान होता है। रात में चंद्रमा का तापमान माइनस 250 डिग्री सेल्सियस से भी कम हो जाता है।

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बेंगलूरु. चंद्रयान-3 का अभियान लगभग पूरा हो चुका है। इसरो के ताजा अपडेट के अनुसार रोवर प्रज्ञान का कार्य पूरा होने के बाद इसे पार्क कर दिया गया है। रोवर प्रज्ञान और लैंडर विक्रम को स्लीप मोड में सेट कर दिया गया है।

इसरो ने ट्वीट कर बताया कि चंद्रयान-3 मिशन में रोवर ने अपना कार्य पूरा कर लिया है। इसे अब सुरक्षित रूप से पार्क कर स्लीप मोड में सेट किया गया है। ल्फा पार्टिकल एक्स-रे स्पेक्ट्रोस्कोप (एपीएक्‍सएस) और एलआइबीएस पेलोड बंद हैं। इन पेलोड से डेटा लैंडर के माध्यम से पृथ्वी पर प्रेषित किया जाता है।

इसरो ने बताया है कि फिलहाल, बैटरी पूरी तरह चार्ज है। सौर पैनल 22 सितंबर को होने वाले अगले सूर्योदय पर प्रकाश प्राप्त करने के लिए समायोजित है। रिसीवर चालू रखा गया है। इसरो को उम्मीद है कि अगले सूर्योदय के दौरान भी रोवर अपना काम कर पाएगा। अगर ऐसा नहीं हुआ तो यह हमेशा भारत के चंद्र राजदूत के रूप में वहीं बना रहेगा।

यह बोले इसरो अध्‍यक्ष

ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान सी -57 (पीएसएलवी -57) द्वारा इच्छित कक्षा में आदित्य-एल1 अंतरिक्ष यान को स्थापित करने के तुरंत बाद भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष डॉ. एस. सोमनाथ ने शनिवार को रोवर प्रज्ञान अब लैंडर विक्रम से करीब 100 मीटर दूर पहुंच चुका है। लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान को कुछ दिनों में नींद में भेज दिया जाएगा क्योंकि वहां अब लंबी ठंडी रात होने वाली है।

उन्होंने कहा कि लैंडर और रोवर, दोनों अच्छे से काम कर रहे हैं। उनके मुताबिक रोवर और लैंडर को नींद में भेजने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी क्योंकि अब चांद के उस हिस्से में ठंडी रात होने वाली है। एक चंद्र दिवस धरती के 14 दिन के समान होता है। रात में चंद्रमा का तापमान माइनस 250 डिग्री सेल्सियस से भी कम हो जाता है।

लैंडर विक्रम ने 23 अगस्त को चंद्रमा की सतह पर सुरक्षित लैंडिंग की थी। इसके बाद रोवर लैंडर से बाहर निकला और लगातार वैज्ञानिक प्रयोगों को अंजाम दिया। इसरो ने कहा कि रोवर को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास ऑक्सीजन, एल्यूमीनियम, सल्फर और अन्य तत्‍वों की उपस्थिति के पुख्‍ता संकेत मिले हैं।