
राजीव मिश्रा
बेंगलूरु. चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग से पहले चंद्रयान-3 मिशन एक अहम पड़ाव पर पहुंच गया है। लैंडिंग से पहले की यह आखिरी सबसे जटिल प्रक्रिया है। बेंगलूरु के इसरो टेलीमेट्री ट्रैकिंग एवं कमांड नेटवर्क (इसट्रैक) में बनाए गए मिशन ऑपरेशन कॉम्पलेक्स (एमओएक्स) में 24 घंटे 7 दिन लगातार कठिन परिश्रम कर रहे इसरो वैज्ञानिक प्रक्षेपण के 34 वें दिन गुरुवार को एक जटिल प्रक्रिया के बाद चंद्रयान-3 के लैंडर विक्रम को प्रोपल्शन मॉड्यूल (पीएम) से अलग करेंगे। यह प्रक्रिया दोपहर लगभग 1 बजे पूरी की जाएगी। मिशन के कुल 10 पड़ावों में से यह पांचवां पड़ाव है।
इसरो अध्यक्ष एस. सोमनाथ ने पत्रिका के साथ एक्सक्लूसिव बातचीत में प्रोपल्शन मॉड्यूल से लैंडर के अलग होने की प्रक्रिया समझाई। उन्होंने बताया कि लैंडर विक्रम को प्रोपल्शन मॉड्यूल से एक बोल्ट के जरिए कस दिया गया है। बोल्ट में पायरो सिस्टम लगाए गए हैं। प्रोपल्शन मॉड्यूल से लैंडर को अलग करने के लिए बेंगलूरु के मिशन ऑपरेशन कॉम्पलेक्स से सेपेरेशन कमांड (बोल्ट कटर कमांड) भेजा जाएगा। कमांड मिलते ही दोनों बोल्ट के पास एक हल्का सा स्पार्क होगा। स्पार्क होते ही एक मामूली सा विस्फोट होगा, जिससे दोनों तरफ के बोल्ट कट जाएंगे और लैंडर विक्रम प्रोपल्शन मॉड्यूल से अलग हो जाएगा। प्रोपल्शन मॉड्यूल और लैंडर के बीच स्प्रिंग लगाए गए हैं, जो लैंडर को लगभग 1 मीटर प्रति सेकेंड की अधिक गति प्रदान करेगा। प्रोपल्शन मॉड्यूल और लैंडर के गति में अंतर आने से लैंडर प्रोपल्शन मॉड्यूल से आगे निकल जाएगा। यह ठीक उसी तरह की प्रक्रिया है जिस तरह से एक उपग्रह को लाॅन्च करने के बाद रॉकेट के आखिरी चरण से अलग कर उसकी कक्षा में स्थापित किया जाता है।
सेपरेशन कमांड से पहले होगी कक्षा की जांच
सोमनाथ ने बताया कि लैंडर को प्रोपल्शन मॉड्यूल से अलग करने के लिए सेपरेशन कमांड भेजने से पहले कुछ सावधानियां भी बरतनी होगी। यह देखना होगा कि चंद्रयान-3 सही कक्षा में हैं या नहीं? उसका ओरिएंटेशन आवश्यक मानदंडों के अनुरूप है या नहीं? क्या कक्षा में किसी तरह की सुधार की जरूरत है? तमाम मानकों को सही पाए जाने पर ही सेपेरेशन कमांड दिया जाएगा।
पथ में आएगा मामूली बदलाव
एक सवाल के जवाब में इसरो अध्यक्ष ने बताया कि प्रोपल्शन मॉड्यूल से लैंडर के अलग होने के बाद उनके ट्रेजेक्टरी (पथ) में मामूली बदलाव आएगा। यह बदलाव तुरंत नहीं होगा। लेकिन, लैंडर के चांद की कक्षा में एक-दो चक्कर लगाने के बाद स्पष्ट होगा। चूंकि, लैंडर को प्रोपल्शन मॉड्यूल से थोड़ा अधिक गति दिया जाएगा इसलिए पथ में मामूली बदलाव आएगा।
चंद्रयान-2 के आर्बिटर से जोडऩे की भी शुरू होगी प्रक्रिया
उन्होंने बताया कि प्रोपल्शन मॉड्यूल से लैंडर के अलग होने के बाद उसे चंद्रयान-2 (दूसरा चंद्र मिशन जो 2019 में लाॅन्च किया गया था) के आर्बिटर से जोड़ने की प्रक्रिया भी शुरू होगी। चंद्रयान-3 को आखिरी मैनुवर के बाद चांद की 153 किमी गुणा 163 किमी वाली कक्षा में स्थापित कर दिया गया है। प्रोपल्शन मॉड्यूल से अलग होने के बाद लैंडर की दो बार डी-बूस्टिंग की जाएगी। पहली बार में उसे लगभग 150 गुणा 120 किमी वाली कक्षा में लाया जाएगा। दूसरी बार उसे चांद के लगभग 150 किमी गुणा 30 किमी वाली कक्षा में पहुंचाया जाएगा। जब लैंडर विक्रम की दूरी चांद से लगभग 30 किमी की ऊंचाई पर रहेगा तब, 23 अगस्त शाम 5.47 बजे उसे चांद की सतह पर उतारने की प्रक्रिया शुरू होगी।
सफलता को लेकर बढ़ा आत्मविश्वास
मिशन अभी तक आशा के अनुरूप बिल्कुल सटीक रहा है। इससे वैज्ञानिकों का उत्साह बढ़ा है और उम्मीद की जा रही है कि इस बार भारत चांद की सतह पर सफलतापूर्वक लैंडर विक्रम को उतारेगा। सोमनाथ ने कहा कि मिशन की सफलता को लेकर आशान्वित हैं। देश की 1.4 अरब जनता को चंद्रयान-3 के सफल लैंडिंग का इंतजार है।
Published on:
17 Aug 2023 01:54 am
बड़ी खबरें
View Allबैंगलोर
कर्नाटक
ट्रेंडिंग
