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उदीयमान सूर्य को अर्घ्य के साथ छठ संपन्न

36 घंटों से अधिक समय तक निर्जला उपवास का पारणा के साथ अनुष्ठान पूर्ण

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chhath puja

उदीयमान सूर्य को अर्घ्य के साथ छठ संपन्न

बेंगलूरु. लोक आस्था का चार दिवसीय महापर्व छठ बुधवार को उदीयमान सूर्य को अघ्र्य अर्पित करने के साथ ही सम्पन्न हो गया। बेंगलूरु में यह पर्व मुख्य रूप से हेब्बाल स्थित कल्याणी टैंक में पूरी श्रद्धा एवं उल्लास के साथ मनाया गया। चेहरे पर उल्लास, मस्तक पर लगा लंबा तिलक, छठ मैया और सूर्यदेव के जयघोष के साथ छठ व्रती उदीयमान सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर छठ घाटों से अपने-अपने घर लौटे।
इससे पहले शहर में विभिन्न स्थानों पर उत्तर भारतीयों ने सुबह सूर्य को अघ्र्य देकर परिवार में सुख-समृद्धि की प्रार्थना की। सिद्धार्थ सांस्कृतिक समिति, सिद्धार्थ सांस्कृतिक परिषद और विश्वकर्मा समाज समिति के संयुक्त तत्वावधान में हेब्बाल कल्याणी टैंक में सुबह चार बजे से ही पूजन के लिए व्रती अपने परिवार के साथ पहुंचने लगे थे। बी नारायणपुर के अंजना मंदिर स्थित तालाब एवं काटमनाल्लूर गेट समृद्धि हॉल परिसर और बीटीएम लेक रोड में निर्मित कृत्रिम तालाब के अलावा पीनिया सेकेंड स्टेज में श्री दुर्गा पूजा समिति ट्रस्ट मंदिर परिसर में निर्मित तालाब में भी तालाब में भी व्रतियों ने सूर्य को दूसरा अघ्र्य अर्पित किया। समिति के सुनील तिवारी ने बताया कि यहां छठ पूजा के लिए स्थायी तालाब बनाया गया है। इस मौके पर आयोजित भक्ति जागरण में सचिन सावरिया ने भजनों की प्रस्तुति दी। पौ फटने के बाद सूर्य देवता की झलक दिखते ही व्रतधारी अघ्र्य देने के लिए कतारबद्ध हो गए। काफी देर तक अघ्र्य का सिलसिला चला और इस दौरान पूरे वातावरण में उल्लास एवं उत्सव का माहौल रहा। पूजन के बाद सभी ने एक-दूसरे को बधाइयां दी और प्रसाद वितरित किए। घर पहुंचकर 36 घंटों से अधिक समय तक निर्जला उपवास रखने वाले व्रतधारियों ने प्रसाद ग्रहण कर पारणा का अनुष्ठान पूर्ण किया। इसके साथ ही अब अगले वर्ष के छठ महापर्व का इंतजार शुरू हो गया।