दरअसल, चिया एक उच्च पोषण वाली फसल है जिसे खाद्य विज्ञानियों ने सुपर फूड का नाम दिया है। अभी तक मैसूरु में किसान इस फसल को लगा रहे थे मगर लगातार सूखे से जूझ रहे उत्तर राज्य के किसानों ने भी इस फसल में रुचि दिखाई है। पिछले वर्ष लगभग 100 किसानों ने यह फसल लगाई थी और कंपनियों ने उसे हाथों हाथ खरीद लिया। सफेद चिया के लिए किसानों को 24 हजार रुपए प्रति क्विंटल का भाव मिला।
कर्नाटक गन्ना उत्पादक संघ के अध्यक्ष के.शांताकुमार ने कहा कि पिछले वर्ष 19 लाख रुपए का चिया किसानों ने बेचा। लगभग 10 टन उत्पादन हुआ था। इस साल 300 किसान इस फसल को लगाएंगे और उत्पादन 30 टन से ऊपर ले जाने का लक्ष्य है। केंद्रीय खाद्य शोध संस्थान (सीएफटीआरआई) ने इस कृषि-तकनीक आधारित फसल के उत्पादन में किसानों की काफी मदद की है। उन्होंने बताया कि बेलगावी, दावणगेरे, यादगिर, चित्रदुर्गा, बागलकोट आदि जिलों से हजारों किसानों ने इस फसल की बीज खरीदी है।
यह सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए सर्वश्रेष्ठ फसल है और इसके उत्पादन में लागत भी काफी कम आती है। उन्होंने कहा कि सभी किसानों को मार्केंटिंग सहयोग प्रदान करना संभव नहीं है क्योंकि वे भी इसमें अभी नए हैं। उन्होंने कहा कि इसमें अधिक जोखिम नहीं लिया जा सकता क्योंकि पिछले वर्ष एचडी कोटे के किसानों ने काले चिया का उत्पादन किया और वह नहीं बिका। दरअसल, चिया में 30 से 35 फीसदी तेल होता है और इसमें ओमेगा-3 फैटी एसिड प्रचूर मात्रा में उपलब्ध होता है। रैयत मित्र ने हूटागल्ली में इसके लिए एक खाद्य प्रसंस्करण कंपनी की स्थापना की है ताकि किसानों को उनकी फसल के लिए सर्वश्रेष्ठ कीमत मिले।