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बाल श्रम : पांच साल में 927 छापे, दो मालिकों पर 20-20 हजार का जुर्माना

कुछ मामलों में सबूतों के अभाव में बरी हुए मालिक

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बाल श्रम : पांच साल में 927 छापे, दो मालिकों पर 20-20 हजार का जुर्माना

बाल श्रम : पांच साल में 927 छापे, दो मालिकों पर 20-20 हजार का जुर्माना

हुब्बल्ली. बाल एवं किशोर श्रम प्रथाओं को लेकर जिला बाल श्रम समिति ने पिछले पांच वर्षों में 927 स्थानों पर छापेमारी की है। इसमें से 37 जगहों पर बाल मजदूर पाए गए और मामले दर्ज किया गया है। वहीं मामले में दो मालिकों पर जुर्माना भी किया गया है। गरीबी, माता-पिता के बिना अनाथ होना, सीखने में रुचि की कमी सहित विभिन्न कारणों से घर छोडकऱ शहर में शामिल होने वाले बच्चे विभिन्न नौकरियों में संलग्न होते हैं। ऐसे बच्चों की निगरानी करने वाले जिला बाल श्रम योजना संघ ने पुख्ता जानकारी के आधार पर छापेमारी कर रक्षा करता है।
नियोक्ताओं के खिलाफ कार्रवाई
बाल श्रम अधिकारियों का कहना है कि बाल श्रम दो प्रकार के होते हैं। चौदह वर्ष से कम आयु के बच्चों से कोई भी कार्य नहीं करवा सकते। 14 साल से ऊपर और 18 साल से कम उम्र के किशोरों को बाल श्रमिक माना जाता है। उन्हें उद्योग, कारखाने, भवन निर्माण सहित खतरनाक कामों के लिए नियुक्त नहीं कर सकते हैं। इसका उल्लंघन कर काम कराने पर मालिक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। बाल श्रम पद्धति के खिलाफ लगातार जागरूकता तथा जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। हर माह अधिकारियों के साथ बैठक, नुक्कड़ नाटक प्रदर्शित करना, पोस्टरों का वितरण, दुकान मालिकों को जागरुकता, विधिक सेवा प्राधिकरण के सहयोग से कानून जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
जिले में पिछले वर्षों में दर्ज मामलों में से, अदालत ने केवल दो मामलों में दो मालिकों को 20-20 हजार का जुर्माना लगाया है। कुछ मामलों में सबूतों के अभाव में मालिकों को बरी कर दिया गया है, जबकि बाकी की जांच की जा रही है। लंबे समय तक चलने वाले मुकदमे भी सजा कम होने का कारण है।
ये क्या कहता है कानून?
बाल और किशोर श्रम (निषेध और नियंत्रण) अधिनियम-1986 के अनुसार बाल और किशोर श्रम को नियोजित नहीं किया जा सकता है। अधिनियम का उल्लंघन करने वाले मालिक को पहली बार अपराध करने पर 6 महीने से 2 साल तक की कैद या 20,000 से 50,000 रुपए तक का जुर्माना या दोनों से दंडित किया जा सकता है। दोबारा अपराध करने पर 1-3 साल की जेल की सजा हो सकती है। अगर माता-पिता अपराधी हैं, तो 10,000 रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। उल्लंघन करने वाला नियोक्ता को बच्चों के पुनर्वास के लिए गठित कल्याण कोष में अपने द्वारा नियोजित प्रत्येक बच्चे के लिए 20,000 रुपए जुर्माने का भुगतान करना चाहिए।
बाल श्रमिक की जानकारी
वर्ष छापामारी पता लगाना मामला
2018-19 256 - -
2019-20 165 3 3
2020-21 178 5 5
2021-22 210 13 13
2022-23 118 16 16
कुल 927 37 37

छापामारी कर उनकी रक्षा करते हैं
विभिन्न कारणों से घर या छात्रावास छोडऩे वाले बच्चे आमतौर पर होटल, बेकरी, गैरेज, बार और रेस्तरां में काम करते हैं। हम ऐसे बच्चों के बारे में जानकारी इक_ा कर उनके कार्यस्थलों पर छापामारी कर उनकी रक्षा करते हैं। हम छापामारी के दौरान बचाए गए बच्चों को बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश करते हैं। बच्चों को घर वापस भेजा जाए, स्कूल भेजा जाए या छात्रावास में भर्ती कराया जाए इस बारे में समिति अंतिम निर्णय लेगी।
-बसवराज पंचाक्षरीमठ, परियोजना निदेशक, जिला बाल श्रम विभाग