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हकीकत बनेगा कल्पनाओं का शहर ‘मालगुडी’

आर.के. नारायण की कल्पनाओं के शहर ‘मालगुडी’ को अब भारतीय रेलवे जमीनी हकीकत बनाने जा रहा है। भारतीय रेलवे ने शिवमोग्गा जिले के अरसलु रेलवे स्टेशन का नामकरण मालगुडी करने का निर्णय किया है।

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हकीकत बनेगा कल्पनाओं का शहर ‘मालगुडी’

अरसलु रेलवे स्टेशन होगा आर.के. नारायण की कल्पनाओं का शहर ‘मालगुडी’
शिवमोग्गा स्थित अरसलु को मिलेगा मालगुडी नाम
बेंगलूरु. आर.के. नारायण की कल्पनाओं के शहर ‘मालगुडी’ को अब भारतीय रेलवे जमीनी हकीकत बनाने जा रहा है। भारतीय रेलवे ने शिवमोग्गा जिले के अरसलु रेलवे स्टेशन का नामकरण मालगुडी करने का निर्णय किया है। अरसलु स्टेशन पर ही मालगुडी-डेज धारावाहिक की शूटिंग हुई थी जो भारतीय टेलीविजन इतिहास के सर्वकालिक सर्वाधिक लोकप्रिय धारावाहिकों में शामिल हैं।

१८ मार्च १९८७ को जब मालगुडी-डेज का टीवी पर प्रसारण शुरू हुआ था उस समय अरसलु स्टेशन पर हर दिन मात्र दो ट्रेने आती-जाती थीं। यह आरके नारायण की कल्पनाओं के अनुरूप था और अरसलु का रेलवे स्टेशन मालगुडी की कल्पना को साकार करता था। ब्रिटिश काल में बना अरसलु स्टेशन अब खंडहर बन चुका है। हालांकि अभी भी अरसलु एक छोटा सा स्टेशन है जहां से हर दिन पांच ट्रेनें गुजरती हैं। भारतीय रेलवे ने मालगुडी नामकरण के अतिरिक्त इस स्टेशन को संरक्षित करने के लिए १.३ करोड़ रुपए से इसका सौंदर्यीकरण करने का निर्णय किया है।

अरसलु स्टेशन पर मालगुडी-डेज की शूटिंग होने के कारण लंबे समय से कई वर्गों की मांग रही है कि इसका नामकरण मालगुडी किया जाए। इस बीच शिवमोग्गा के सांसद बीवाई राघवेंद्र ने मालगुडी को पहचान देने के लिए अरसलु के नाम परिवर्तन की पहल की है। दक्षिण पश्चिम रेलवे (दपरे) की उप महाप्रबंध ई. विजया के अनुसार स्टेशन का नाम बदलने के लिए यदि आम नागरिकों या किसी चुने हुए प्रतिनिधि से अनुरोध प्राप्त होता है, तो रेलवे पहले इसे राज्य सरकार को भेजती है। राज्य सरकार से मंजूरी मिलने के बाद इस पर रेल मंत्रालय को अंतिम निर्णय लेना होता है।

टीवी का पहला वास्तविक शहर बना था मालगुडी
प्रख्यात लेखक आरके नारायण की लघु कथाओं में मालगुडी नामक एक काल्पानिक शहर का जिक्र आता है। बाद में इसी को आधार बनाकर निर्देशक एवं कलाकार शंकर नाग ने मालगुडी-डेज धारावाहिक का निर्माण किया था। इसमें शंकर नाग के भाई आनंद नाग और लेखक एवं कलाकार गिरीश कर्नाड ने अहम भूमिका अदा की थी। विशेषकर १९९० के दशक के शुरूआती दौर में हिंदी और अंग्रेजी में बने मालगुडी-डेज ने घर घर में अपनी पहचान बनाई। टीवी के माध्यम से मालगुडी का काल्पनिक शहर एक जीवंत शहर के रूप में परिणित हो गया और उस दौर में कई लोगों की ऐसी धारणा रही कि आरके नारायण का मालगुडी दक्षिण भारत का कोई वास्तविक शहर है।