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केवल 15 फीसदी ही सूखे व गीले कचरे का वर्गीकरण

तमाम अनुरोध के बावजूद अधिकांश शहरवासी निवासी गीला तथा सूखा कचरा अलग नहीं कर रहे हैं। शहर से रोजाना औसतन 5700 टन कचरा निकलता है, इसका केवल पंद्रह फीसदी ही वर्गीकृत हो पाता है।

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केवल 15 फीसदी ही सूखे व गीले कचरे का वर्गीकरण

केवल 15 फीसदी ही सूखे व गीले कचरे का वर्गीकरण

बेंगलूरु. तमाम अनुरोध के बावजूद अधिकांश शहरवासी निवासी गीला तथा सूखा कचरा अलग नहीं कर रहे हैं। शहर से रोजाना औसतन 5700 टन कचरा निकलता है, इसका केवल पंद्रह फीसदी ही वर्गीकृत हो पाता है।

राष्ट्रीय हरित पंचाट (एनजीटी) ने गीले और सूखे कचरे के एक साथ निस्तारण पर रोक लगाई है। मगर बृहद बेंगलूरु महानगर पालिका (बीबीएमपी) के लिए कचरे का वर्गीकरण बड़ी चुनौती बन गया है। शहर में कई जगह पर कचरे से कंपोस्ट खाद उत्पादन की इकाईयां स्थापित की गई हैं। हालांकि इनमें केवल गीला कचरा ही स्वीकृत किया जाता है। ये इकाइयां मिश्रित कचरा नहीं ले रही हैं।

महापौर एम. गौतम कुमार ने पद संभालने के बाद से कचरा निस्तारण पर जोर दिया है। इसके लिए उन्होंने देश के ऐसे शहरों से कचरा निस्तारण व्यवस्था की जानकारी जुटाई है, जो इस दिशा में बेहतर काम कर रहे हैं।
इसके लिए मध्यप्रदेश के इंदौर के स्थानीय निकाय के अधिकारी और बीबीएमपी के साथ जानकारियों का आदान-प्रदान करेंगे। इसके अलावा मलेशिया तथा इंडोनेशिया के कचरा निस्तारण की प्रक्रिया का भी अध्ययन किया जा रहा है। शहर के गीले तथा सूखे कचरे के प्रसंस्करण के लिए 410 करोड़ रुपए की लागत से 8 इकाइयां स्थापित की गई हैं। इनकी क्षमता प्रतिदिन 2800 टन कचरा प्रसंस्करण की है। मगर यहां केवल गीला तथा सूखा वर्गीकृत कचरा ही प्रयोग में लाया जाता है।

शहरवासियों की सोच में बदलाव नहीं
बीबीएमपी के आयुक्त बीएच अनिलकुमार के मुताबिक शहर के सभी 198 वार्ड में कचरे के वर्गीकरण के लिए कई अभियान चलाए जा रहे हैं। घर-घर से कचरा संग्रहित करते समय इस पर ध्यान दिया जा रहा है। मनमाने स्थान पर कचरा फेंकने वालों पर निगरानी के लिए मार्शल तैनात किया गए हैं। इसके बावजूद आज भी शहर के अधिकांश लोगों की मानसिकता में बदलाव नहीं आया है। लोग घर में गीले तथा सूखे कचरे का वर्गीकरण नहीं कर रहे हैं। जब तक लोग घर में ही वर्गीकरण नहीं करेंगे तब तक स्थायी समाधान संभव नहीं है। वार्ड स्तर पर सैकड़ों टन कचरे का वर्गीकरण आसान नहीं है। इसके बावजूद वार्ड स्तर ही कचरे के वर्गीकरण के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।

हाल में कर्नाटक उच्च न्यायालय ने भी शहर में कचरे के निस्तारण को लेकर बीबीएमपी प्रशासन को फटकार लगाई है। केंद्र सरकार के निर्देश के तहत शहर में संग्रहित कचरे का मूल स्रोत पर ही वर्गीकरण करना अनिवार्य है। इस नियम का पालन करने के लिए प्रशासन के साथ शहर के निवासियों को सहयोग करना होगा।