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भाष्य जाप करने से मन में एकाग्रता: मुनि राजपद्मसागर

धारवाड़ में हुआ भाष्य जाप

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भाष्य जाप करने से मन में एकाग्रता: मुनि राजपद्मसागर

भाष्य जाप करने से मन में एकाग्रता: मुनि राजपद्मसागर

बेंगलूरु. मुनि राजपद्मसागर ने कहा कि मुद्रा सहित जाप करने से जाप का प्रभाव बढ़ता है। अलग-अलग मुद्रा के साथ में परमात्मा का नाम जपने से शरीर में से अनेक प्रकार की बीमारियां दूर होती हैं। मन स्थिर नहीं रहता हो तो भाष्य जाप करने से मन में एकाग्रता आती है। सामूहिक भाष्य जाप करने से सामूहिक पुण्य का उपार्जन होता है। अक्षय तृतीया के दिन प्रथम तीर्थकर ऋषभदेव प्रभु ने श्रेयांश कुमार के हाथों 400 तप पूर्ण होने पर उपवास का पारणा किया था। आदिनाथ प्रभु की महिमा बताते हुए मुनि श्रमणपद्मसागर ने कहा कि इस अवसर्पिणीकाल के प्रथम राजा यतिहार तीर्थंकर ने हमें जीवन जीना सिखलाया। मुनिवृन्द ने दोपहर को धारवाड़ से हुब्बल्ली के लिए विहार किया।

मंदिर पर चढ़ाई ध्वजा
बेंगलूरु. सुमतिनाथ जैन श्वेताम्बर मंदिर, यलहंका की 30 वीं वर्षगांठ पर मनोहरलाल, वसंतकुमार वेदमूथा परिवार ने ध्वजा चढ़ाई। सुबह स्नात्र पूजा हुई। कार्यक्रम में प्रकाश कोठारी, अशोक लुकड़, गौतम भंडारी, जयंतीलाल श्रीश्री माल , कमलेश ओस्तवाल सहित श्रध्दालु उपस्थित थे।