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स्कूल, ऑफिसों के समय में बदलाव पर विचार करें, हाई कोर्ट ने यातायात के हालात पर किया गौर

जनहित याचिका की सुनवाई में अदालत ने कहा कि उद्योग और श्रम सचिव उद्योगों, कारखानों, चैंबर ऑफ कॉमर्स और अन्य प्रतिनिधियों की बैठक बुलाएं। कारखानों, वाणिज्यिक उद्यमों और अन्य कार्यस्थलों में समय को संशोधित करने पर राय लें।

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बेंगलूरु में यातायात की बदहाली का बयान करती तस्‍वीर। पत्रिका फोटो : बीवी विजय कुमार

बेंगलूरु. कर्नाटक उच्च न्यायालय ने सुझाव दिया है कि राज्य सरकार शैक्षणिक संस्थानों और विभिन्न उद्योगों और कॉर्पोरेट व्यवसायों के समय में संशोधन की संभावना पर विचार करे। शहर में बिगड़ती यातायात की स्थिति पर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने यह बात कही।

मुख्य न्यायाधीश प्रसन्ना बी. वराले और न्यायमूर्ति कृष्ण एस. दीक्षित की पीठ ने मंगलवार को जनहित याचिका की नवीनतम सुनवाई में कहा कि उद्योग और श्रम सचिव उद्योगों, कारखानों, चैंबर ऑफ कॉमर्स और अन्य प्रतिनिधियों की एक बैठक बुलाएं। कारखानों, वाणिज्यिक उद्यमों और अन्य कार्यस्थलों में समय को संशोधित करने पर उनकी राय लें।

हाई कोर्ट ने कहा कि इसी तरह, राज्य सरकार स्कूल शिक्षा और उच्च शिक्षा सचिव के माध्यम से हितधारकों की एक बैठक बुला सकती है और स्कूल के समय को फिर से तय करने का मुद्दा उठा सकती है, ताकि यातायात पद दबाव कम किया जा सके और बच्चों की सुरक्षा के पहलू पर भी विचार किया जा सके।

समर्पण ट्रस्ट द्वारा 2020 में दायर जनहित याचिका में शहरों में यातायात की भीड़ से बचने के लिए सुप्रीम कोर्ट के 2014 के निर्देश को लागू करने की मांग की गई थी। जनहित याचिका में विशेष रूप से मेखरी सर्कल और बीडीए मुख्य कार्यालय के बीच यातायात प्रबंधन वैज्ञानिक तरीके से करने की मांग की गई थी।

हाई कोर्ट ने अधिकारियों को 2023-24 में नम्मा मेट्रो लाइनों के विस्तार पर एक परियोजना रिपोर्ट प्रस्तुत करने का भी निर्देश दिया। राज्य सरकार को यातायात की स्थिति को कम करने के लिए किए गए उपायों पर एक स्थिति और कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया और जनहित याचिका की सुनवाई छह सप्ताह के लिए स्थगित कर दी गई।