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किन्नली में राज्य के पहले खिलौना क्लस्टर के लिए भूमि पूजन

वोकल फॉर लोकल : बनेंगे देसी, बिकेंगे अंतरराष्ट्रीय बाजार में

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किन्नली में राज्य के पहले खिलौना क्लस्टर के लिए भूमि पूजन

किन्नली में राज्य के पहले खिलौना क्लस्टर के लिए भूमि पूजन

बेंगलूरु. जिला मुख्यालय कोप्पल में को आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री बीएस येडियूरप्पा ने देश के पहले खिलौना क्लस्टर के लिए भूमिपूजन किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'वोकल फॉर लोकलÓ घोषणा के तहत यहां स्थानीय किन्नाली कारीगर देशी खिलौने बनाएंगे।
करीब 400 एकड़ में स्थापित इस क्लस्टर में पहले चरण में 5 हजार करोड़ रुपए का निवेश होगा। पहले चरण में यहां 50 खिलौना बनाने वाली इकाईयां खुलेंगी। क्लस्टर के माध्यम से स्थानीय कलाकारों के देशी खिलौनों का देश-विदेश में विपणन किया जाएगा।
प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक पहले चरण में यहां दस हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। किन्नाली खिलौने देश-विदेश में मशहूर हैं। विपणन का सशक्त मंच नहीं होने से खिलौना कारीगरों को अपेक्षित आय नहींं हो रही थी। लेकिन अब आत्मनिर्भर भारत योजना के अंतर्गत देशी कलाकारों को प्रोत्साहित करने के लिए क्लस्टर स्थापित किए जा रहे हैं। वर्ष 2023 में इस क्लस्टर के दूसरे चरण का विस्तार होगा।
इस अवसर पर बृहद उद्यम मंत्री जगदीश शेट्टर, कृषि मंत्री बीसी पाटिल, कोप्पल क्षेत्र के सांसद करडी संगण्णा, पूर्व मंत्री आरवी देशपांडे, बसवराज रायरेड्डी तथा स्थानीय विधायक आचार हालप्पा उपस्थित थे।

यह क्लस्टर मेरी संकल्पना : कुमारस्वामी
बेंगलूरु. पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने कहा कि किन्नाली खिलौना क्लस्टर की रूपरेखा उनके कार्यकाल में बनी थी। कुमारस्वामी ने ट्वीट किया कि खिलौना कारोबार पर चीन का एकाधिकार है। विश्व में प्रतिवर्ष 7 लाख करोड़ रुपए मूल्य के खिलौने बेचे जाते हैं। इस कारोबार में देशी कलाकारों का स्थान नगण्य है। इस खामी को दूर करने के लिए उन्होंने चन्नपट्टण तथ कोप्पल के किन्नाली खिलौने को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने के लिए इस योजना की रूपरेखा तय की थी। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात की खुशी है कि आज यह संकल्पना साकार हो रही है। येे क्लस्टर देशी कारिगरों के लिए वरदान साबित होंगे।
चन्नपट्टण तथा किन्नाली के खिलौने पहले से ही देश विदेश में मशहूर हैं। लेकिन विपणन की सही व्यवस्था नहीं होने के कारण यही खिलौने बेचकर विदेशी कंपनियां लाभ कमाती थीं। खिलौना क्लस्टर के माध्यम से देशी कारीगरों को एक सशक्त मंच उपलब्ध हो रहा है। इससे सैकड़ों लोगों को रोजगार मिलेगा।