
मुंबई में हाई सीरो पॉजिटिविटी होने के बावजूद कोरोना संक्रमण से राहत नहीं।
निखिल कुमार.
बेंगलूरु. चिकित्सक सीटी (साइकिल थ्रेशोल्ड) वैल्यू (cycle threshold value) को कोविड पॉजिटिव व्यक्ति में कोरोना संक्रमण की व्यापकता को मापने का बेहतर सूचकांक बता रहे हैं। कई चिकित्सकों का कहना है कि आरटी-पीसीआर जांच में सीटी वैल्यू (विषाणु की मात्रा) की जानकारी महत्वपूर्ण है। जांच कराने वाले ज्यादातर लोगों को सीटी वैल्यू की जानकारी नहीं है। जिन्हें है वे अब इसे जानने पर जोर देने लगे हैं। लैबों से सीटी वैल्यू (CT Value) की मांग करने लगे हैं।
यूरोपियन जर्नल ऑफ क्लिनिकल माइक्रोबायोलॅजी एंड इन्फेक्शस डिजीज में हाल ही में प्रकाशित एक रिपोर्ट में भी कहा गया है कि 33-34 से ऊपर सीटी वैल्यू वाले संक्रामक नहीं हैं और उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे देनी चाहिए। हालांकि , कुछ विशेषज्ञ सीटी वैल्यू के आधार पर कोरोना मरीजों की छुट्टी के पक्ष में नहीं हैं। दिक्कत ये है कि सरकारी जांच रिपोर्ट में सीटी वैल्य का जिक्र नहीं है जबकि कई निजी लैब अपनी रिपोर्ट में प्राथमिकता से इसका जिक्र करते हैं।
दरअसल, कोविड पॉजिटिव (covid positive) मरीज की सीटी वैल्यू 24 से कम है तो इसका मतलब है कि उसमें वायरल लोड ज्यादा है। उससे दूसरे लोग जल्दी व तेजी से कोरोना संक्रमित हो सकते हैं। अगर सीटी वैल्यू 24 से ज्यादा है तो उस व्यक्ति से दूसरे लोगों के संक्रमित होने की आशंका कम होगी।
एक वरिष्ठ चिकित्सक ने बताया कि भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर ) सीटी वैल्यू को अवैज्ञानिक मानता है। इस सरकारी लैब रिपोर्ट में इसकी जानकारी नहीं देते हैं। अब तो आइसीएमआर (The Indian Council of Medical Research ) ने भी सीटी वैल्यू को उपचार में सहायक माना है। इसके आधार पर लोगों को पॉजिटिव या निगेटिव माना जा सकता है।
आइसीएमआर के अनुसार सीटी वैल्यू 35 या इससे कम हो तो संबंधित व्यक्ति को कोविड पॉजिटिव माना जा सकता है। इससे ज्यादा होने पर रिपोर्ट को निगेटिव मान सकते हैं। हालांकि, आइसीएमआर ने स्पष्ट किया है कि सीटी वैल्यू 24 से कम वाले लोगों को ही पॉजिटिव मानने से कई पॉजिटिव मरीजों के छूटने का खतरा रहेगा।
छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. रविंद्र मेहता के अनुसार बेहतर नैदानिक उपकरण विकसित होने तक सीटी वैल्यू का इस्तेमाल किया जा सकता है। सीटी वैल्यू के आधार पर कई चिकित्सक निर्णय ले रहे हैं कि संक्रमित को अस्पताल में भर्ती करने या फिर घर पर रख कर ही उपचार करने की जरूरत है। विशेषज्ञों के मुताबिक, वायरस अलग-अलग प्रकार से लोगों को संक्रमित करता है। कुछ मरीजों को यह ज्यादा प्रभावित करता है और कुछ को कम। यह इस बात पर निर्भर करता है कि मरीजों में विषाणु की मात्रा कितनी है। हाल ही में कुछ ऐसे केस आए थे, जहां मरीजों में यह वायरस मृत मिला था।
डॉ. जगदीश हिरेमठ ने बताया कि कई निजी लैब सीटी वैल्यू के साथ रिपोर्ट जारी कर रहे हैं। कई ऐसे भी हैं जो केवल पूछने पर ही इसकी मौखिक जानकारी देते हैं। निजी चिकित्सक मरीजों को उसी लैब में भेजते हैं जो सीटी वैल्यू की जानकारी देते हैं। डॉ. हिरेमठ के अनुसार सीटी वैल्यू 20-25 के बीच हो तो होम आइसोलेशन की सलाह देते हैं। लेकिन, ऑनलाइन परामर्श से मरीज की निगरानी होनी चाहिए। 20 से कम सीटी वैल्यू वाले मरीजों को अस्पताल में भर्ती किए जाने की जरूरत है। विशेषकर 50 से ज्यादा उम्र के उन मरीजों को जिन्हें अन्य बीमारियां भी हैं।
एस्टर लैब की डॉ. कविता एमपी ने बताया कि सीटी वैल्यू और कोरोना संक्रमण के संबंधों पर अभी और अध्ययन की जरूरत है। किट के प्रकार, जांचने का तरीका, जांचने वाले की योग्यता व तकनीकी क्षमता, सैंपल एकत्र करने एवं इसके लैब पहुंचने के बीच का समय महत्वपूर्ण है। इन सभी सहित अन्य कई तथ्यों पर सीटी वैल्यू निर्भर करती है। वायरल लोड कम होने के बावजूद कई मरीज गंभीर रूप से बीमार पड़ सकते हैं। ज्यादा सीटी वैल्यू कई बार झूठी सुरक्षा का आभास करा सकती है।
Published on:
24 Apr 2021 11:21 am
बड़ी खबरें
View Allबैंगलोर
कर्नाटक
ट्रेंडिंग
