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कावेरी जल विवाद: इस आदेश के बाद भी नहीं छोड़ना चाहता कर्नाटक पानी

जल विवाद के हल और राज्य की स्थिति को लेकर दिल्ली में की बैठक

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बेंगलूरु: कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच उपजा कावेरी जल विवाद का कोई हल नहीं निकल पा रहा है। सरकार का कहना है कि कर्नाटक में कम बारिश के कारण सुखे की स्थिति बनी हुई है। वहीं दूसरी ओर तमिलनाडु प्रतिदिन कावेरी का जल छोड़ने पर अड़ा हुआ है। मंगलवार को भी कर्नाटक के कृष्णा सागर बांध से तमिलनाडु को 5,000 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। कर्नाटक सरकार ने यह आपूर्ति कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के आदेश की अनुपालना करते शुरू की। लेकिन इस पर कर्नाटक के डिप्टी सीएम डी के शिवकुमार ने मंगलवार को कहा था कि राज्य कैच 22 की स्थिति में है। मामला कोर्ट में है। इसलिए कर्नाटक को पानी छोड़ना पड़ रहा है। इस मामले पर उन्होंने केन्द्र से हस्तक्षेप की मांग भी की थी।
वहीं बुधवार को फिर से दिल्ली में दोनों राज्यों के मंत्रियों के साथ बैठक आयोजित हुई। जिसमें कर्नाटक के सीएम सिद्धरामय्या, डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार, राज्य के सांसद और मंत्री शामिल हुए। बैठक में कावेरी विवाद के अलावा, केंद्र सरकार के समक्ष लंबित राज्य परियोजनाओं और सूखा राहत मुद्दों पर भी चर्चा की गई।

बैठक में मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या ने कहा कि हम तमिलनाडु को पानी छोड़ने के सीडब्ल्यूएमए के आदेश के खिलाफ निषेधाज्ञा के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे। हम शाम को केंद्रीय जल संसाधन मंत्री के साथ भी बैठक कर रहे हैं। दोनों राज्यों के लोगों को बुलाने और रिपोर्ट करने का अधिकार है। इसलिए हमने प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की अपील की है। उन्होंने कहा कि शाम को केंद्रीय जल संसाधन मंत्री की बैठक के बाद अगला निर्णय लिया जाएगा।
वहीं डिप्टी सीएम शिवकुमार ने कहा कि “हम बहुत संकटपूर्ण स्थिति का सामना कर रहे हैं। हम केवल एक तिहाई पानी ही ले पा रहे हैं। सीडब्ल्यूएमए ने हमें 5000 क्यूसेक पानी देने का आदेश दिया है। 15 दिन हो गए, हमारे पास पीने के लिए पानी भी नहीं है। हमने इस पर सभी संसद सदस्यों से चर्चा की है, जिन्होंने हमें आश्वासन दिया है कि वे हमारी लड़ाई का समर्थन करेंगे। हम सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष इस बात पर दबाव डाल रहे हैं कि हमें न्याय दिया जाए।”

जदयू नेता एचडी कुमारस्वामी बोले…

कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और जदयू के वरिष्ठ नेता एचडी कुमारस्वामी ने भी मामले को लेकर मंगलवार को कहा कि कावेरी जल विवाद को लेकर कर्नाटक के लोग तमिलनाडु से निराश हैं। उन्होंने दावा किया कि “तमिलनाडु भारत में संघीय ढांचे को नुकसान पहुंचा रहा है।”
कुमारस्वामी ने आगे कहा कि ”हमने यहां एक बांध बनाया है और हमने इसे अपने लोगों के पैसे से बनाया है। केंद्र सरकार ने इसके लिए कोई फंड नहीं दिया। ये बात समझनी होगी। बांध हमारे राज्य में है, हमने बनाया है। हम कावेरी विवाद में 200 वर्षों तक तमिलनाडु के प्रभुत्व को सहन करने के लिए बने हैं। क्या यह संघवाद है?”
“हमें एक मजबूत निर्णय लेना होगा। कितने वर्षों तक यह आधिपत्य सहन किया जाए? यदि आदेश का पालन नहीं किया गया तो क्या वे हमें जेल में डाल देंगे? उन्हें हमें जेल भेजने दीजिए। यह किस तरह का संघीय ढांचा है,” कुमारस्वामी ने पूछा।
उन्होंने कहा कि “राज्य में सभी राजनीतिक दलों को मतभेदों को कम करके एकजुट होना चाहिए। तमिलनाडु में सभी राजनीतिक दल एक हो गए हैं। उसी तरह कर्नाटक में भी सभी पार्टियों को एक साथ आना चाहिए। फिर भी, हम राजनीति के लिए एक-दूसरे से लड़ रहे हैं।