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रक्षा उत्पादन : अब तेजस लगाएगा बेड़ा पार

एचएएल को स्वदेशी युद्धक से बड़ी उम्मीदें एलसीए डिविजन में आइओसी स्तर के सभी तेजस की असेंबलिंग प्रगति पर

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रक्षा उत्पादन : अब तेजस लगाएगा बेड़ा पार

बेंगलूरु. हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के एलसीए डिवीजन में पांच हल्के लड़ाकू विमान तेजस की एसेंबलिंग तीव्र गति से चल रही है।

एचएएल को प्रारंभिक परिचालन मंजूरी (आईओसी) मानक के 16 तेजस वायुसेना को सौंपना है जिसमें से 10 सौंपे जा चुके हैं। बाकी छह विमानों से एक तेजस इसी महीने और शेष 5 मार्च 2019 तक सौंप दिए जाएंगे।

दरअसल, एचएएल के एलसीए डिविजन और दूसरी उत्पादन इकाई में गतिविधियां चरम पर हैं। अभियंता और परियोजना से जुड़े अन्य कर्मचारी हर हाल में मार्च 2019 की समय-सीमा से पहले शेष तेजस तैयार करनेे को लेकर आश्वस्त हैं।

अगले दो सप्ताह के भीतर 11 वां तेजस वायुसेना को सौंप दिया जाएगा जबकि दो और दिसम्बर में सौंपे जाने की उम्मीद है। वहीं, तेजस एसपी-12 से लेकर तेजस एसपी-16 तक के विमान उत्पादन के अंतिम चरण में हैं।

तेजस एसपी-12, एसपी-14 और एसपी-16 की एसेंबलिंग एलसीए डिविजन में हो रही है जबकि एसपी-13 और एसपी-15 की एसेंबलिंग दूसरी उत्पादन इकाई में चल रही है। यह पहला अवसर है जब तेजस डिविजन में गतिविधियां इतनी तीव्र हैं।

हालांकि, एक समय तेजस को लेकर कई तरह की आशंकाएं जाहिर की जा रही थीं लेकिन आज यह एचएएल ही नहीं वायुसेना और देश के लिए भी उम्मीद की एक किरण बन गया है।

एलसीए डिविजन में कार्यरत एक हजार से अधिक कर्मचारियों को इस बात का अहसास है कि एचएएल का भविष्य अब तेजस के उत्पादन और प्रदर्शन में ही है।

इससे परियोजना से जुड़े कर्मचारियों और इससे जुड़े अंशधारकों में भी एक नई ऊर्जा दिख रही हैै। एचएएल, वायुसेना और तेजस का विकास करने वाली वैमानिकी विकास एजेंसी (एडीए) के बीच तालमेल भी बेहतर हुआ है।

रक्षा उत्पादन सचिव डॉ अजय कुमार ने हाल ही में परियोजना की समीक्षा की थी और सभी अंशधारकों को तेजस उत्पादन से जुड़ी बाधाओं को दूर करने के लिए कहा।

तेजस का उत्पादन बढ़ाने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि परियोजना को लेकर एक स्पष्ट दृष्टिकोण अपनाएं। अजय कुमार की समीक्षा और परस्पर चर्चा से भी कर्मचारियों का उत्साह बढ़ा है।

एचएएल के एक अधिकारी ने कहा कि एलसीए तेजस डिविजन में उत्पादन में लगातार वृद्धि हुई है। वर्ष 2015-16 में सिर्फ एक तेजस के उत्पादन से शुरुआत हुई थी जो दो और फिर 5 तेजस प्रति वर्ष तक पहुंचा।

वर्ष 2018 -19 के दौरान उम्मीद है कि एचएएल 8 तेजस का उत्पादन करने में सफल रहेगा। कुछ मुद्दे थे जिन्हें अब सुलझा लिया गया है। तेजस एसपी-13 और एसपी-15 अगले महीने उड़ान भरने को तैयार है।

दरअसल, रफाल युद्धक विमान सौदे के ऑफसेट ठेके से वंचित होने के बाद एचएएल काफी विवादों में रहा और तेजस उत्पादन दर को लेकर चौतरफा आलोचना भी हुई। अब एचएएल ने कुछ तेज तर्रार अधिकारियों को एलसीए डिविजन में तैनात किया है।

हॉक उत्पादन में अहम भूमिका निभाने वाले अधिकारी अब एलसीए डिविजन में हैं। इन्हीं अधिकारियों की बदौलत हॉक की आपूर्ति एचएएल समय-सीमा से पहले करने में सफल रहा।

वहीं एचएएल को अब एलएंडटी एयरोस्पेस से मिलने वाले तेजस उपकरणों की आपूर्ति का भी इंतजार है। मेक इन इंडिया कार्यक्रम के तहत निजी कंपनियां तेजस उत्पादन में बड़ी भूमिका निभाएंगी और अधिकांश ढांचे तथा उपकरणों की आपूर्ति करेंगी। एसपी-16 तेजस के विंग्स की आपूर्ति एलएंडटी की ओर से ही की जानेे वाली है।


अभी बाकी है एफओसी की पगबाधा
उधर, अंतिम परिचालन मंजूरी (एफओसी) मानक के तेजस तैयार करने की भी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। हालांकि, तेजस को अगले महीने तक एफओसी हासिल करने की समय सीमा तय है परंतु देखना होगा कि स्वदेशी युद्धक यह मील का पत्थर पार कर पाता है या नहीं।

एफओसी मानक का पहला तेजस एसपी-21 होगा। एफओसी मानक के तेजस एसपी-21 और एसपी-22 का एयरफ्रेम भी तैयार हो रहा है। वहीं, एसपी-23 और एसपी-24 तेजस पर अगले महीने के पहले सप्ताह में काम शुरू हो जाएगा।

एचएएल अधिकारियों को उम्मीद है कि एसपी-21 तेजस की पहली उड़ान अक्टूबर 2019 में हो जाएगी। एचएएल को भरोसा है कि वर्ष 2019-20 के दौरान एक बेंचमार्क कायम करते हुए 16 तेजस विमानों की आपूर्ति वायुसेना के लिए कर देगा।

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