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बदल गई है नारी के जीवन की परिभाषा: साध्वी

श्रीरंगपट्टण में प्रवचन

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बेंगलूरु. श्रीरंगपट्टण के दिवाकर मिश्री गुरु राज दरबार में साध्वी डॉ. कुमुदलता ने पर्युषण पर्व के पांचवें दिवस के बारे में बताया। गायिका साध्वी डॉ. महाप्रज्ञा ने कहा कि आजादी के बाद से हमारे देश में परिवर्तन की हवा बह रही है। आजादी का युग स्त्री का युग है।

औरत अब मनुष्य के हाथों में कठपुतली नहीं हैं वह एक मात्र ड्रॉइंग रूम में सजावट का टुकड़ा नहीं है। वह अज्ञानता से बाहर आ गई है। एक नए और समृद्ध भारत के निर्माण में जिम्मेदारी के प्रति सचेत है। आज हमारे देश में जिस प्रकार से नारी के जीवन में बदलाव आया है और वह जिस तरह से अपने जीवन में संघर्षों से लडक़र निरंतर आगे बढ़ रही है वह बहुत सराहनीय है।

साध्वी ने कहा कि आज की नारी के जीवन की परिभाषा बदल चुकी है अब वो एक पढ़ी लिखी, आत्मविश्वास से भरी हुई एक सशक्त नारी है। वह आत्मनिर्भर है। साध्वी ने कहा कि कोई भी धार्मिक कार्य बिना पत्नी नहीं किया जाता है। यह भारतीय संस्कृति में महिलाओं को देवी, दुर्गा, लक्ष्मी आदि का यथोचित सम्मान दिया है। अत: उसे उचित सम्मान दिया जाना चाहिए। साध्वी डॉ पदमकीर्ति ने अंतकुर्तदशा सूत्र का वाचन किया।

साध्वी राजकीर्ति ने कल्पसूत्र का विवेचन किया। भगवान महावीर स्वामी का जन्म कल्याणक नाटिका के रूप में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। महावीर स्वामी के जन्म कल्याणक व्यवस्था के लाभार्थी प्रकाशचंद गौतमचन्द रूणवाल रहे।