
राज्योत्सव पुरस्कार का अवमूल्यन : लीलादेवी आर प्रसाद
बेंगलूरु. पूर्व मंत्री लीलादेवी आर प्रसाद के मुताबिक राज्योत्सव पुरस्कार धीरे-धीरे अपनी पवित्रता खो रहा है। कोई भी पुरस्कार हो पुरस्कार मांगा नहीं जाता बल्कि प्रदान किया जाता है।
जब वह कन्नड़ संस्कृति विभाग की मंत्री थी तब इस पुरस्कार के चयन के लिए पहले एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया जाता था। यह समिति ही राज्योत्सव पुरस्कार से सम्मानित व्यक्तियों का चयन करती थी। लेकिन आज यह पुरस्कार पाने के लिए आवेदन देने की नौबत आ गई है।
जिन लोगों ने वास्तव में कोई उपलब्धि हासिल की है ऐसे लोग पुरस्कार के लिए आवेदन करना पसंद नहीं करते है। इसलिए इस पुरस्कार के चयन के लिए पुन: पहले जैसी व्यवस्था होनी चाहिए। किसी को भी किसी की सिफारिश के आधार पर पुरस्कृत नहीं किया जाना चाहिए।
सियासी परछाई
राज्य में गठबंधन सरकार होने के कारण राज्योत्सव पुरस्कारों पर भी राजनीतिक परछाई दिखेगी। सचिवालय के गलियारों में चर्चा है कि गठबंधन के दोनों घटकों दलों के नेता अपने समर्थकों को अधिक से अधिक संख्या में पुरस्कार दिलवाना चाहते हैं।
कुछ नेताओं का कहना है कि सरकार, निगम-मंडलों, विश्वविद्यालयों के सिंडिकेट व सहकारी समितियों में मनोयन की तरह पुरस्कार में भी दोनों दलों के हिस्सेदारी तय होनी चाहिए।
बताया जाता है कि कांग्रेस नेताओं ने मुख्यमंत्री को चेतावनी दी है कि चाहे पुरस्कारों की संख्या जितनी हो, 65 फीसदी पुरस्कार कांग्रेस की सिफारिश पर दिए जाने चाहिए। कांग्रेस की यह मांग कुमारस्वामी के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। बताया जाता है कि इस पर मसले प्रदेश कांग्रेस प्रभारी के.सी. वेणुगोपाल, उपमुख्यमंत्री डॉ जी परमेश्वर और मंत्रिमंडल के वरिष्ठ सहयोगियों से चर्चा के बाद अंतिम निर्णय लेंगे।
इन्हें मिलता है पुरस्कार
राज्योत्सव पर हर साल कन्नड़ व संस्कृति विभाग की ओर से यह पुरस्कार दिया जाता है। नियमों के तहत कला, साहित्य, नृत्य, खेल, नाटक, विज्ञान,संगीत, फिल्म, लोककला, समाजसेवा, शिक्षा, चिकित्सा जैसे विभिन्न क्षेत्रों में योगदान देनेवालों को पात्र माना जाता है। वर्ष 1966 से यह पुरस्कार दिया जाता है।
क्या मिलता है पुरस्कार में
पुरस्कार के तहत सम्मानित किए जाने वाले व्यक्तिों अथवा संगठन को 20 ग्राम वजन के सोने का पदक, एक लाख रुपए की राशि और प्रशस्ति पत्र मिलता है।
कैंपेगौड़ा पुरस्कार में हुआ था विवाद
बेंगलूरु के संस्थापक कैंपेगौड़ा की जयंती के मौके पर बृहद बेंगलूरु महानगर पालिका की ओर से दिए जाने वाले कैंपेगौड़ा पुरस्कार को लेकर इस साल काफी विवाद हुआ था। पुरस्कार के लिए मानक तय नहीं होने और अंतिम क्षणों के सूची में नाम जोड़े जाने के कारण पुरस्कार पाने वालों की संख्या 450 से ज्यादा हो गई, जिसके कारण पुरस्कार वितरण समारोह में अफरा-तफरी की स्थिति बन गई थी। तब मुख्यमंत्री कुमारस्वामी पुरस्कार वितरण समारोह में भी नहीं गए थे।
Published on:
27 Oct 2018 08:33 pm

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