
विधायकों में निराशा स्वाभाविक: परमेश्वर
बेंगलूरु. मंत्रिमंडल में स्थान पाने से चूके विधायकों और उनके समर्थकों की नाराजगी के संदर्भ में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष व उप मुख्यमंद्धी डॉ. जी परमेश्वर ने कहा कि मंत्रिमंडल के गठन के बाद थोड़ा बहुत असंतोष पैदा होना सामान्य बात है और इसे दूर कर लिया जाएगा। कुमारस्वामी के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार को विकास की दिशा में काम करना है। इसमें हमारी तरफ से क्या क्या योगदान करना है और मंत्रियों का किस तरह से इस्तेमाल करना है इस बारे में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने दिशा निर्देश दिए हैं।
राहुल गांधी ने कांग्रेस के हिस्से के 22 पदों में से 6 पद रिक्त रखने व शीघ्र ही इन पदों पर नियुक्तियां करके मंत्रिमंडल का विस्तार करन को कहा है। मंत्रिमंडल के विस्तार के बारे में राहुल गांधी, केसी वेणुगोपाल, सिद्धरामय्या तथा उन्होंने बैठक करके किसे मंत्री बनाना है और किसे कौन सा विभाग देना है इस बारे में सूची को अंतिम रूप दिया था। यह सूची पहले ही मुख्यमंत्री कुमारस्वामी को सौंपी गई है और वे शुक्रवार तक विभागों के बंटवारे के संबंध में अधिकृत रूप से घोषणा करेंगे।
परमेश्वर ने कहा कि कांग्रेस के पास 22 मंत्री पद ही होने के कारण हम सभी जिलों को प्रतिनिधित्व नहीं दे सके। कोडुगू, हासन, मंड्या, उडुपी जैसे जिलों में कांग्रेस का कोई विधायक नहीं जीता है। इन जिलों में प्रभारी मंत्री नियुक्त करने के संबंध में चर्चा की जा रही है। पहली बार विधायक बनने वालों को मंत्री नहीं बनाने के आलाकमान के निर्देश दोने के कारण 15 दावेदारों को मंत्री बनने का अवसर नहीं मिल सका। आर. शंकर भी हालांकि पहली बार विधायक बने हैं लेकिन उनको पार्टी में शामिल करते समय मंत्री बनाने का वादा किया गया था।
परमेश्वर ने कहा कि मंत्रिमंडल के विस्तार के दौरान उन पर द्वेष की राजनीति करने के आरोप लगाए गए हैं जो सत्य से परे हैं। मंत्रिमंडल का विस्तार कोई उन्होंने अकेले नहीं किया है, बल्कि सभी ने साथ बैठकर निर्णय किया है। इतना ही नहीं, आलाकमान से चर्चा करने से पहले इस मसले पर हमने वीरप्पा मोइली, मल्लिकार्जुन खरगे, के.एच. मुनियप्पा, डी.के. शिवकुमार के साथ अलग-अलग बातचीत करके सभी की राय एकत्रित करने के बाद उचित निर्णय किया गया है और इसमें उनकी कोई व्यक्तिगत भूमिका नहीं हैं।
Published on:
08 Jun 2018 06:30 pm
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