
नेताओं के विवादित बयान बने भाजपा की हार का कारण !
बेंगलूरु. लोकसभा व विधानसभा की पांच सीटों के उपचुनाव में भाजपा की हार के लिए राज्य के कुछ नेताओं की बयानबाजी को कारण बताते हुए प्रदेश भाजपा ने पार्टी आलाकमान को रिपोर्ट भेजी है।
सूत्रों का कहना है कि उपचुनाव में भाजपा की हार के कारणों के संबंध में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने प्रदेश मामलों के प्रभारी मुरलीधर राव को विस्तार से रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए। राव ने विधायकों व सांसदों की राय लेकर पार्टी आलाकमान को रिपोर्ट भेजी है।
सूत्रों के अनुसार बल्लारी सीट पर भाजपा की हार के लिए पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या के पुत्र राकेश सिद्धरामय्या की मौत के बारे में जनार्दन रेड्डी के अवांछित बयान तथा श्रीरामुलु को अगला मुख्यमंत्री बनाने के संबंध में विधायक वी. सोमण्णा के विवादास्पद बयान को प्रमुख कारण बताया गया है।
इसके अलावा गठबंधन सरकार के घटक दलों द्वारा उपचुनाव के दौरान सत्ता के दुरुपयोग को भी हार का एक और कारण बताया गया है।
रिपोर्ट में कहा गयाकि रामनगर व मंड्या सीटों से अधिक उम्मीद नहीं थी लेकिन मतदान से केवल दो दिन पहले रामनगर से पार्टी के उम्मीदवार एल. चंद्रशेखर के मैदान से हटने के कारण बड़ा आघात पहुंचा। इस घटनाक्रम के कारण दूसरी सीटों पर भी पाटी के बारे में गलत संकेत गया।
मूल कार्यकर्ता को टिकट नहीं देकर बाहरी उम्मीदवार को टिकट देना भी बड़ी गलती रही। इसी तरह मतदान से मात्र 48 घंटे पहले जनार्दन रेड्डी की सिद्धरामय्या के पुत्र की मौत को लेकर की गई विवादास्पद टिप्पणी के कारण न केवल कुरुबा समुदाय बल्कि वाल्मीकि समुदाय के वोटों से भी वंचित होना पड़ा।
हालांकि इससे पहले हुए चुनावों में वाल्मीकि, लिंगायत तथा कुरुबा समुदाय के लोग पार्टी के साथ रहे लेकिन रेड्डी के एक बयान के कारण इन सभी समुदायों ने हमपर पलटवार किया।
श्रीरामुलु को अगला मुख्यमंत्री बताने के सोमण्णा के बयान के कारण लिंगायत समुदाय के मतदाता पार्टी से विमुख हो गए और येडि़्डयूरप्पा को अगला मुख्यमंत्री नहीं बनाने पर भाजपा का साथ क्यों दें यह सोचकर इस समुदाय के मतदाताओं में जहां कुछ ने कांग्रेस के पक्ष में मतदान किया।
वहीं कुछ लोगों ने मतदान में भी हिस्सा नहीं लिया। इसी तरह विधायक श्रीरामुलू के प्रति हद से ज्यादा निर्भरता को भी हार का एक और कारण माना गया है।
रिपोर्ट में जमखंडी में पिता के निधन से उत्पन्न सहानुभूति कांग्रेस के उम्मीदवार की जीत का कारण बनी। लिंगायत बहुल वाली इस सीट पर ब्राह्मण समुदाय के श्रीकांत कुलकर्णी को टिकट देने से भाजपा को लिंगायतों के वोटों से वंचित होना पड़ा और लिंगायत बहुल ब्लाक में कांग्रेस बहुमत बनाने में कामयाब हो गई। इसके अलावा स्थानीय नेताओं ने भी आपसी मतभेद भुलाकर पार्टी के पक्ष में काम नहीं किया।
शिवमोग्गा सीट पर भाजपा की कम अंतर से जीत के लिए गठबंधन के उम्मीदवार को हद से अधिक शराब व धन बांटने को प्रमुख कारण बताया गया।
मुरलीधर राव ने अपने रिपोर्ट में जनार्दन रेड्डी के साथ दूरी बनाकर रखने के सब नेताओं को निर्देश देने के साथ ही चुनाव से पहले किसी तरह का विवादित बयान नहीं देने की सभी नेताओं को कड़ी चेतावनी देने की सिफारिश की बताते हैं।
उधर, चर्चा है कि उपचुनावों में हार और अनंत कुमार के निधन के बाद पार्टी आलाकमान प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन पर भी विचार कर रहा है। कई नेताओं के नाम चर्चा में हैं।
हालांकि, अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के बुधवार को संक्षिप्त मेंगलूरु दौरे के दौरान भी कुछ नेताओं ने इस बारे में मांग की।
ऐसे नेताओं का तर्क है बी एस येड्डियूरप्पा के पास प्रदेश अध्यक्ष और विपक्ष के नेता की दोहरी जिम्मेदारी है।
Published on:
16 Nov 2018 06:56 pm
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