
दो मंत्रालयों पर रेवण्णा के दावे से जद (ध) में असंतोष
बेंगलूरु. गठबंधन सरकार का नेतृत्व कर रहे जनता दल (ध) नेता एचडी कुमारस्वामी के लिए कांग्रेस से ज्यादा अपने बड़े भाई एचडी रेवण्णा को मनाकर रखना ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो गया है। एचडी देवेगौड़ा के बड़े बेटे रेवण्णा की नजर लोक निर्माण के साथ-साथ ऊर्जा विभाग पर भी है लेकिन, पार्टी के भीतर उनके खिलाफ आवाज मुखर हो रही है।
स्वंय कुमारस्वामी भी रेवण्णा से इसे लेकर नाराज बताए जाते हैं। जद (ध)-कांग्रेस और जद (ध)-भाजपा गठबंधन सरकार में ये दोनों विभाग संभाल चुके रेवण्णा ने बड़ी चतुराई से देवेगौड़ा के जरिए राहुल गांधी पर दबाव बनाकर यह विभाग पार्टी के खाते में रखवा लिया। कुमारस्वामी रेवण्णा की इस दबाव की रणनीति से खुश नहीं थे मगर होलेनरसीपुर से पांच बार चुने गए रेवण्णा की शुरू से ही इन दोनों विभागों पर नजर है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधानसभा में बहुमत परीक्षण से पहले कांग्रेस विधायकों को एकजुट रखने वाले डीके शिवकुमार भी ऊर्जा विभाग अपने पास रखना चाहते थे। जब यह विभाग कांग्रेस के हाथ से निकला तो वे भी नाराज हुए।
इन सबसे बेपरवाह रेवण्णा दोनों बड़े विभाग अपने पास रखना चाहते हैं। सूत्रों का कहना है कि उन्होंने अपने पिता से यह भी कहा है कि वे हासन जिले से किसी और विधायक को मंत्री नहीं बनाएं। इस बीच केआर नगर के विधायक सा.रा. रमेश ने मीडिया से बातचीत में कहा कि रेवण्णा को दोनों विभाग नहीं सौंपा जाना चहिए। चामुंडेश्वरी से सिद्धरामय्या को हराकर जायंट किलर बने जी टी देवेगौड़ा भी रेवण्णा की चाल से खुश नहीं है। हालांकि, जी टी देवेगौड़ा को सहकारिता विभाग दिए जाने की चर्चा है लेकिन उनका कहना है कि वे वर्ष 1969 से सहकारिता क्षेत्र में रहे हैं और इस बार अगर उन्हें यह विभाग दिया जाता है तो वे स्वीकार नहीं करेंगे। इससे पहले वर्ष 2006 में जद (ध)-भाजपा गठबंधन सरकार में वे सहकारिता मंत्री ही रहे थे। जीटी देवेगौड़ा को सा.रा. गोविंद के अलावा पेरियापट्टणा के विधायक के. महादेव और टी.नरसीपुर के विधायक अश्विनी कुमार का समर्थन भी मिल रहा है। इन तीनों नेताओं ने एकसुर में कहा है कि रेवण्णा या तो लोक निर्माण विभाग रखें या ऊर्जा विभाग।
उनके अलावा सात बार विधान परिषद सदस्य रहे बसवराज होरट्टी ने भी मंत्री पद की मांग करते हुए प्राथमिक या माध्यमिक शिक्षा विभाग पर अपना दावा पेश किया है। हालांकि, अटकलें है कि पार्टी उन्हें विधान परिषद का सभापति बनवा सकती है। होरट्टी ने इसपर नाराजगी जताते हुए कहा है कि वे सभापति के पद को लेकर उन्हें तनिक भी रुचि नहीं है। वे 38 साल से विधान परिषद के सदस्य रहे हैं। शिक्षा क्षेत्र में उनके अनुभवों को देखते हुए यह विभाग उन्हें दिया जाना चाहिए। पार्टी के भीतर कई नेताओं का समर्थन भी होरट्टी को मिल रहा है।
इन तमाम विवादों के बीच अगर कुमारस्वामी रेवण्णा को लोक निर्माण और ऊर्जा विभाग दोनों देते हैं तो तो इससे न सिर्फ कांग्रेस और जद (ध) बल्कि देवेगौड़ा के परिवार के भीतर ही घमासान मचने की संभावना है। रेवण्णा के बेटे प्रज्वल पहले ही पार्टी का टिकट नहीं मिलने से कुमारस्वामी से नाराज हैं। सूत्रों का कहना है कि देवेगौड़ा परिवार को एक साथ रखने की पूरी कोशिश कर रहे हैं लेकिन यह तो समय ही बताएगा कि विभागों के बंटवारे के बाद क्या होगा।
Published on:
05 Jun 2018 04:54 pm
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