12 फ़रवरी 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

पब और रेस्तरां में ध्रूमपान के लिए बने अलग कक्ष में ना हो मेज या कुर्सियां

नया आदेश : अब पूरे राज्य में ध्रूमपान पर प्रतिबंध

2 min read
Google source verification
jainism

पब और रेस्तरां में ध्रूमपान के लिए बने अलग कक्ष में ना हो मेज या कुर्सियां

बेंगलूरु. प्रदेश सरकार ने तत्काल प्रभाव से पूरे राज्य में सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान पर प्रतिबंध लगा दिया है। अब तक केवल बृहद बेंगलूरु महानगर पालिक क्षेत्र में ही धूम्रपान प्रतिबंधित था। लेकिन अब पूरे राज्य में इसे लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।

इसके साथ ही सरकार ने पब और रेस्तरांओं को निर्देश दिए हैं कि ध्रूमपान के लिए अनविार्य तौर पर अलग कक्ष बनाया जाए।

नगरी प्रशासन विभाग की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि इन कक्षों में ना तो मेज होगी और ना ही कुर्सियां। लोग सिर्फ खड़े होकर ही ध्रूमपान कर सकेंगे। इसका का उल्लंघन करने वाले रेस्तरां और पबों के लाइसेंस रद्द किए जाएंगे।

शहरी विकास और आवास मंत्री यूटी खादर ने सोमवार को बताया कि प्रदेश सरकार तंबाकू और शराब को कर पर दी गई रियायत भी रद्द करने पर विचार कर रही है।

प्रदेश में धूम्रपान प्रतिबंधित करने पर हुई बैठक में तय किया गया कि केंद्र सरकार को पत्र लिख कर हवाई अड्डे पर संचालित ड्यूटी फ्री दूकानों में भी शराब और तंबाकू उत्पाद प्रतिबंधित करने का अनुरोध किया जाएगा।

खादर ने चेतावनी दी कि हालिया अध्ययनों के अनुसार पैसिव स्मोकिंग या परोक्ष धूम्रपान से बचने का कोई सुरक्षित स्तर नहीं है।

यह तय करना मुश्किल है कि पैसिव स्मोकिंग स्वास्थ्य को किस हद तक और कितना प्रभावित करती है। ऐसे में बार, पब और होटल के कर्मचारियों और विशेषकर महिला कर्मचारियों के स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता है।

अध्ययन बताते हैं कि पैसिव स्मोकिंग असल धूम्रपान के बराबर ही हानिकारक है। धूम्रपान मुक्त होटल वाले विश्व के सर्वोत्तम शहर प्रमाण हैं कि ऐसे होटल व्यापार और पर्यावरण दोनों के लिए लाभदायक हैं।

धूम्रपान भी आग लगने के प्रमुख कारणों में से एक है। अग्निशमन विभाग भी इस पर चिंता जता चुका है।

खादर ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार गैर संचारी बीमारियों (एनसीडी) में विशेष कर हृदय रोग, स्ट्रोक, धमुमेह, कैंसर चिंता का विषय है। देश में 61 फीसदी मौतें इन बीमारियों के कारण होती हंै।

जबकि वर्ष 2008 में एनसीडी के कारण 52 लाख लोग मरे। एनसीडी के लिए तंबाकू काफी हद तक जिम्मेदार है। वैश्विक आंकड़ों की बात करें तो वयस्कों में एनसीडी से होने वाली 14 प्रतिशत मौतों का कारक अकेले तंबाकू है।