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डोनिमलाई खदान बंद होने से 1 हजार करोड़ रुपए का नुकसान

देश की सबसे बड़ी खनन कंपनी एनएमडीसी ने लौह अयस्क निकालने का काम स्थगित कर दिया है। जिससे राज्य और केंद्र सरकार को बड़े पैमाने पर राजस्व नुकसान हुआ है।

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डोनिमलाई खदान बंद होने से 1 हजार करोड़ रुपए का नुकसान

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-प्रीमियम बढ़ाने के बाद नहीं हो रहा खनन
-एनएमडीसी को जल्द निपटारे की उम्मीद

बेंगलूरु.

Ballari जिले के Donimalai खान से लौह अयस्क निकालने पर राज्य सरकार द्वारा 80 प्रतिशत प्रीमियम लगाने के फैसले के बाद देश की सबसे बड़ी खनन कंपनी एनएमडीसी ने लौह अयस्क (Iron ore) निकालने का काम स्थगित कर दिया, जिससे राज्य और केंद्र सरकार को बड़े पैमाने पर राजस्व नुकसान हुआ है।

यहां 3 नवम्बर 2018 से खनन कार्य बंद है। कंपनी के शीर्ष अधिकारियों के मुताबिक डोनिमलाई से National Mineral Development Corporation (एनएमडीसी) को 70 लाख टन लौह अयस्क के खनन की अनुमति है। अगर वर्तमान मूल्य के हिसाब से देखें तो खनन बंद होने से केंद्र और राज्य सरकार को 1 हजार करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। रॉयल्टी के तौर पर इसमें राज्य सरकार की हिस्सेदारी 450 करोड़ रुपए होती है। वहीं, केंद्र सरकार की अनुमानित क्षति 583 करोड़ रुपए है, क्योंकि उसे कॉरपोरेट टैक्स के तौर पर भी नुकसान हुआ है।

पिछले वित्तीय वर्ष के दौरान अक्टूबर महीने तक NMDC ने 20 लाख टन लौह अयस्क का खनन किया था। एनएमडीसी के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक एनबी कुमार ने कहा कि कंपनी रॉयल्टी के तौर पर 20 फीसदी के अलावा अन्य करों का भुगतान करती है। इन सबके अलावा 80 फीसदी प्रीमियम देना संभव नहीं है। इससे कंपनी भारी घाटे में चली जाएगी। कंपनी को डोनिमलाई में 1560 करोड़ रुपए का राजस्व घाटा हुआ, जिसमें से 650 करोड़ रुपए का शुद्ध घाटा शामिल है। डोनिमलाई में खनन एवं बुनियादी विकास के लिए कंपनी ने 3 हजार करोड़ रुपए का निवेश किया।

उन्होंने कहा कि 'हमने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि खनन पट्टे का नवीनीकरण पुरानी शर्तों के अनुरूप हो। राज्य सरकार हमारे प्रति सकारात्मक रुख दिखा रही है। उम्मीद है कि यह मुद्दा जल्दी सुलझ जाएगा।' इससे पहले राज्य सरकार द्वारा इस खदान से अयस्क की बिक्री पर 80 प्रतिशत प्रीमियम लगाने के फैसले को एनएमडीसी ने कर्नाटक उच्च न्यायालय में चुनौती दी। उच्च न्यायालय की ओर से इस पर एनएमडीसी को राहत भी मिली। लेकिन, हाइकोर्ट के फैसले को मानने की बजाय राज्य सरकार ने लीज रद्द कर दिया।

उसके बाद एनएमडीसी ने सरकार के फैसले को खनन पंचाट में चुनौती दी और पंचाट ने फैसले पर रोक लगा दी। डोनिमलाई खदान के बंद होने से जहां 1 हजार करोड़ का राजस्व नुकसान हुआ, वहीं 2 हजार ठेका मजदूर बेरोजगार हो गए और 700 से अधिक स्थायी कर्मी बेकार बैठे हैं।