19 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

कर्नाटक के 500 निजी मंदिरों में डे्रस कोड लागू होगा

कर्नाटक देवस्थान-मठ मट्टू धार्मिक संस्था महासंघदेवस्थान मंत्री से भी करेंगे मांग

2 min read
Google source verification
कर्नाटक के 500 निजी मंदिरों में डे्रस कोड लागू होगा

कर्नाटक के 500 निजी मंदिरों में डे्रस कोड लागू होगा

बेंगलूरु. वर्तमान में देश के कई मंदिरों, गुरुद्वारों, चर्च, मस्जिद और अन्य पूजा स्थलों, निजी प्रतिष्ठानों, स्कूल-कॉलेजों, अदालतों और पुलिस आदि में ड्रेस कोड लागू है। इसी तर्ज पर मंदिरों की पवित्रता, शिष्टाचार और संस्कृति को बनाए रखने के लिए कर्नाटक देवस्थान-मठ मट्टू धर्मिक संगठनों के महासंघ की बैठक के दौरान अधिक से अधिक राज्यों में भारतीय संस्कृति के अनुरूप निजी मंदिरों में ड्रेस कोड लागू करने का निर्णय किया है। पूरे कर्नाटक में 500 मंदिर और बेंगलूरु में 50 निजी मंदिर हैं जहां डे्रस कोड का पालन किया जाएगा। यह बात कर्नाटक देवस्थान-मठ मट्टू धर्मिक संगठन महासंघ के समन्वयक मोहन गौड़ा ने कही। वे बेंगलूरु के वसंतनगर में लक्ष्मी वेंकटरमण स्वामी मंदिर में एक संवाददाता सम्मेलन में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि बेंगलूरु के साथ-साथ कर्नाटक के सभी मंदिरों में ड्रेस कोड लागू करने के लिए एक व्यापक अभियान चलाया जाएगा ताकि भक्तों में ड्रेस कोड के बारे में जागरूकता पैदा की जा सके। बेंगलूरु के लगभग 50 मंदिरों में ड्रेस कोड शुरू किया जाएगा। इसमें वासवी मंदिर शिवाजीनगर, अंजनेय स्वामी मंदिर, गाळी अंजनेय स्वामी मंदिर, लक्ष्मी वेंकटरमण स्वामी मंदिर, राम मंदिर आदि शामिल हैं।
उन्होंने श्रद्धालुओं से मंदिरों की पवित्रता की रक्षा करने और भारतीय संस्कृति और ड्रेस कोड का पालन करने की अपील की है। मंदिर के सामने इस अपील का एक बोर्ड भी लगाया गया है। इस सम्मेलन में देवस्थान महासंघ के समन्वयक मोहन गौड़ा, वासवी मंदिर के सचिव नागेश बाबू,आंजनेय मंदिर शिवाजी नगर के ट्रस्टी प्रदीप कुमार, अर्चक महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष वेंकटचलैया, डॉ. बी.एन., अखिल भारत असंगठित पुरोहित कर्मिक परिषद के सचिव महेश कुमार, हिंदू जनजागृति समिति, बेंगलूरु के समन्वयक शरथ भी उपस्थित थे।

इससे पहले, मंदिरों और धार्मिक परंपराओं की सुरक्षा के लिए 16 और 17 दिसम्बर 2023 को बेंगलूरु में आयोजित कर्नाटक देवस्थान-माथा मट्टू धार्मिक संस्था महासंघ की राज्य स्तरीय बैठक में उपरोक्त आशय का एक प्रस्ताव पारित किया गया था। इसे प्रदेश के मंदिरों में लागू किया जा रहा है। 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर, महाराष्ट्र का घृष्णेश्वर मंदिर, वाराणसी का काशी-विश्वश्वर मंदिर, आंध्र का तिरूपति बालाजी मंदिर, केरल में प्रसिद्ध पद्मनाभस्वामी मंदिर, कन्याकुमारी में माता मंदिर में ड्रेस कोड लागू किया जा चुका है।
मोहन गौड़ा ने कहा पश्चिमी कपड़ों की तुलना में भारतीय कपड़े आध्यात्मिक रूप से अधिक शुद्ध और सभ्य होते हैं। साथ ही भारतीय परिधान पहनने से हमारी संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा और युवा पीढ़ी में स्वाभिमान भी जागृत होगा। साथ ही पश्चिम से तुलना करने पर पारंपरिक परिधान निर्माण उद्योग को बढ़ावा मिलेगा। ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। यदि हम मंदिर में आध्यात्मिक शुद्धता को अधिक हद तक आत्मसात करना चाहते हैं, तो हमारा आचरण और पहनावा आवश्यक रूप से आध्यात्मिक रूप से शुद्ध होना चाहिए। उन्होंने बताया कि प्रदेश के सभी मंदिरों में डेस कोड लागू करने की मांग को लेकर इस सप्ताह देवस्थान मंत्री रामलिंगा रेड्डी से मिलेंगे। उनके सभी मंदिरों में डे्रस कोड लागू करने की मांग करेंगे।