
बेंगलूरु. लंबे इंतजार के बाद नम्मा मेट्रो (namma metro) की येलो लाइन की चालक रहित ट्रेन के छह डिब्बे बुधवार को यहां पहुंच गए। मेट्रो अधिकारियों के अनुसार, डिब्बों को चीन के शेंग हाई से समुद्र के रास्ते चेन्नई भेजा गया, जहां से उन्हें सडक़ मार्ग से बेंगलूरु के हेब्बागोडी डिपो तक पहुंचाया गया। डिब्बे लगभग 3 बजे हेब्बागोडी डिपो पहुंचे। इन डिब्बों की अनलोडिंग गुरुवार को होगी।
अधिकारियों के अनुसार, शेंग हाई से बेंगलूरु तक की पूरी यात्रा 21 दिनों की थी। शेंग हाई बंदरगाह से 24 जनवरी को समुद्री यात्रा पर निकले कोच 6 फरवरी को चेन्नई पहुंचे। 10 फरवरी को चेन्नई बंदरगाह पर सीमा शुल्क द्वारा मंजूरी दी गई। उसी दिन ये डिब्बे सडक़ मार्ग के जरिये चेन्नई से बेंगलूरु रवाना हुए। भारी वाहनों की दिन के समय आवाजाही पर प्रतिबंध के कारण उन्हें केवल रात में ले जाया जा सका। बेंगलूरु पहुंचने से पहले वे तमिलनाडु के कांचीपुरम, वेल्लोर और कृष्णागिरी में रुके।
अगले कुछ दिनों में इन ड्राइवर-रहित कोचों का डिपो के भीतर स्थैतिक परीक्षण किया जाएगा, जिसमें डिपो के अंदर पटरियों पर परीक्षण भी शामिल है। डिपो में परीक्षणों की एक शृंखला के बाद, कोचों का मेट्रो की पटरियों पर परीक्षण किया जाएगा। यह पूरी प्रक्रिया कुछ महीनों तक चलेगी।
सरकार जुलाई में लाइन खोलने तैयार
आर.वी. रोड-बोम्मासंद्र एलिवेटेड लाइन इसी साल जुलाई तक चालू होने का दावा किया जा रहा है। राज्यपाल थावर चंद गहलोत ने विधानमंडल के संयुक्त सत्र में अपने संबोधन में यह बात कही थी। हालांकि, जानकारों का साफ कहना है कि डिब्बे नहीं होने के कारण ऐसा होने की संभावना बहुत क्षीण है।
पूरे डिब्बे आने में एक साल लगेगा
साल 2019 में एक चीनी कंपनी सीआरआरसी नानजिंग पुजेन कंपनी लिमिटेड ने बीएमआरसीएल को 216 मेट्रो कोच बनाकर देने के लिए 1,578 करोड़ रुपए का अनुबंध हासिल किया। लेकिन वे समय पर ऑर्डर पूरा नहीं कर सके। अब शेष कोचों का निर्माण भारत में तीतागढ़ रेल सिस्टम्स द्वारा किया जाना है। अधिकारियों ने कहा कि तीतागढ़ रेल सिस्टम्स कईं चरणों में बीएमआरसीएल को कोच उपलब्ध कराएगी। माना जा रहा है कि डिलीवरी मार्च 2025 तक पूरी होने की उम्मीद है।
Published on:
14 Feb 2024 11:50 pm
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