
बेंगलूरु. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा यह स्वीकार करने के एक दिन बाद कि कर्नाटक को सूखा राहत राशि जारी करने में देरी हुई है, राज्य सरकार ने रविवार को कर्नाटक के साथ अन्याय करने के लिए केंद्र की आलोचना की। सूखा राहत देने में केंद्र की देरी को लेकर सरकार पहले ही सुप्रीम कोर्ट जा चुकी है। मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या और उपमुख्यमंत्री व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डी.के. शिवकुमार ने इस मामले को लेकर केंद्र पर हमला किया। दोनों नेताओं ने राज्य के साथ केंद्र के भेदभाव करने के आरोपों को दोहराया।
मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या ने केंद्रीय मंत्री निर्मला पर सूखा राहत कोष को लेकर झूठ बोलने का आरोप लगाया। केंद्रीय मंत्री ने कहा था कि आचार संहिता लागू होने की वजह से अनुदान जारी नहीं किया गया। सिद्धरामय्या के अनुसार केंद्रीय मंत्री ने झूठ बोला कि आदर्श आचार संहिता लागू होने के कारण सूखा राहत कोष जारी नहीं किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य ने सूखा राहत के लिए दिसंबर में ही ज्ञापन सौंप दिया था।
उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा कि कर्नाटक में देश में दूसरा सबसे अधिक टैक्स जमा होने के बावजूद केंद्र सरकार द्वारा राज्य को राहत राशि जारी नहीं की गई। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी 10 साल से प्रधानमंत्री हैं। क्या उन्होंने बेंगलूरु के लिए कुछ किया है? जब राज्य के लोग बाढ़ और सूखे से पीड़ित थे, तब मोदी और अमित शाह कर्नाटक नहीं आए। आज तक सूखा राहत के लिए राज्य के हिस्से से एक रुपया भी जारी नहीं किया गया है। कर्नाटक के सात करोड़ लोगों को राज्य के लोगों को धोखा देने वाली भाजपा को हराकर अपने आत्मसम्मान की रक्षा करनी चाहिए।
केंद्र सरकार बोल रही है झूठ
सिद्धरामय्या ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि कर्नाटक से 4.30 लाख करोड़ रुपए टैक्स के रूप में केंद्र को जाता है और जब हम सूखा राहत के लिए राशि मांगते हैं, तो केंद्र सरकार द्वारा झूठ बोला जाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने दिसंबर में राहत राशि मांगी थी। फिर भी कर्नाटक में सूखा राहत के लिए एक भी रुपया जारी नहीं किया गया। क्या यह कर्नाटक के लोगों के साथ अन्याय नहीं है?
उधर, शिवकुमार ने रविवार को कहा कि वे राज्य सरकार के खिलाफ निराधार आरोप लगाने के बाद सच्चाई स्वीकार कर रही हैं। शिवकुमार ने कहा, कितने महीने पहले हमने सूखा राहत के लिए केंद्र को ज्ञापन सौंपा था? हमारी याचिका के साढ़े चार महीने बाद तक चुनाव आयोग की ओर से कोई आदर्श आचार संहिता या प्रतिबंध नहीं था। शिवकुमार ने कहा, मैं यह स्वीकार करने के लिए केंद्रीय मंत्री को धन्यवाद देता हूं कि कर्नाटक के साथ अन्याय हुआ है। उन्होंने कहा कि सीतारमण अब तक सूखा राहत को लेकर राज्य सरकार पर आरोप लगा रही थीं।
उन्होंने कहा, कर्नाटक ने मार्च में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और केंद्र को राज्य के लिए तुरंत सूखा राहत देने का निर्देश देने की मांग की। कर्नाटक ने राहत के रूप में 18,171.44 करोड़ रुपए मांगे हैं क्योंकि असफल मानसून के बाद 236 तालुकों में से 221 को सूखा प्रभावित घोषित किया गया था। राज्य में मानसून में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई,जिससे लगभग 48 लाख हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई।
वकीलों से चर्चा में दिल्ली पहुंचे मंत्री
इस बीच, राजस्व मंत्री कृष्णा बैरेगौड़ा सुप्रीम कोर्ट में सूखा राहत में देरी को लेकर केंद्र के खिलाफ मामले में राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले वकीलों के साथ चर्चा करने के लिए दिल्ली के दौरे पर हैं। राष्ट्रीय आपदा राहत कोष (एनडीआरएफ)के तहत सूखा राहत जारी करने में हस्तक्षेप की मांग करते हुए राज्य सरकार ने मार्च में केंद्र द्वारा सूखा राहत जारी करने में देरी पर शीर्ष अदालत में याचिका दायर थी। राजस्व विभाग के सूत्रों ने कहा कि मंत्री अदालत में कर्नाटक के तर्क के लिए रणनीति तैयार करने के लिए वकीलों से चर्चा करेंगे।
Updated on:
08 Apr 2024 12:14 am
Published on:
08 Apr 2024 12:13 am
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