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नशे के काले कारोबार पर नहीं कस पा रहा शिकंजा, युवा हो रहे शिकार

- पुलिस की सख्ती के बावजूद मामलों में नहीं आ रही कमी- आइटी सिटी में ड्रग्स की समस्या गंभीर

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नशे के काले कारोबार पर नहीं कस पा रहा शिकंजा, युवा हो रहे शिकार

नशे के काले कारोबार पर नहीं कस पा रहा शिकंजा, युवा हो रहे शिकार

निखिल कुमार

कभी Garden City और Pensioners Paradise के नाम से मशहूर Bengaluru शहर में नशीले पदार्थों (Drugs) का व्यापार बढ़ता ही जा रहा है। अवैध बाजार फल-फूल रहा है और पिछले कुछ वर्षों से नशीली दवाओं का भंडाफोड़ आम हो गया है। जहां 2018 में नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट, 1985 के तहत 286 मामले दर्ज किए गए थे, वहीं 2022 में 4,027 मामले दर्ज किए गए।

दक्षिण कन्नड़ और उडुपी में अवैध नशीली दवाओं की बिक्री और खपत में तेज वृद्धि देखी जा रही है। बेंगलूरु पुलिस ने इस वर्ष 24 मार्च को 4297.88 किलोग्राम ड्रग्स जलाया। 90.8 करोड़ रुपए के ये ड्रग्स अक्टूबर 2022 और मार्च 2023 के बीच पकड़े गए थे। पुलिस शिक्षण संस्थानों में जागरुकता अभियान भी चला रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार ज्यादा कमाई करने वाले युवा और नशीली दवाओं के दुरुपयोग के प्रति संवेदनशील लोग डीलरों के प्रमुख टारगेट होते हैं। पड़ोसी राज्यों से लगे Karnataka की सीमा के चप्पे-चप्पे पर निगरानी आसान नहीं है। मादक पदार्थों की तस्करी आसान हो जाती है। कई राजमार्गों से डीलर यहां पहुंचते हैं। चिकित्सकों के अनुसार साथियों का दबाव और मानसिक तनाव युवाओं में नशे की लत बढ़ने के कई प्रमुख कारणों में हैं।

गिरफ्त में 20-30 वर्ष के युवा

बेंगलूरु में सबसे अधिक कारोबार होने वाले नशीले पदार्थों में भांग, गांजा (cannabis) के अलावा सिंथेटिक दवाएं शामिल हैं। अधिकांश ग्राहक 20 और 30 वर्ष के युवा वयस्क हैं। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (Narcotics Control Bureau) के अनुसार जितने भी ड्रग रैकेट का भंडाफोड़ होता है, उनमें ज्यादातर आरोपी कॉलेज छात्र और युवा होते हैं।

स्रोत खत्म नहीं किया तो चलता रहेगा धंधा

शहर में नशीले पदार्थों से लड़ने का काफी अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, बेंगलूरु एक वैश्विक शहर है, जिसमें पर्याप्त खर्च करने योग्य आय और पब संस्कृति के साथ एक जीवंत मध्यम वर्ग है। शहर में नशीले पदार्थों की बाजार में हमेशा मांग रहेगी। यदि आपूर्ति स्रोत को निष्प्रभावी नहीं किया गया, तो शहर में नशीले पदार्थों की बाढ़ आती रहेगी।

अधिकांश आदतन अपराधी

पकड़े गए अधिकांश ऐसे विदेशियों के पास उचित दस्तावेज नहीं होते हैं। इनमें से अधिकांश आदतन अपराधी होते हैं। एनडीपीएस अधिनियम के तहत मामला दर्ज होने के कारण मामलों का निपटारा होने तक उन्हें निर्वासित नहीं किया जा सकता है। इसमें कई साल लग जाते हैं। इस बीच, वे जमानत ले लेते हैं, बाहर आ जाते हैं और फिर से नशीली दवाओं की तस्करी शुरू कर देते हैं।
चुनौतियां अनेक

Drug dealers के काम करने का तरीका समय के साथ बदला है। कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए इन्हें हर बार पकड़ पाना किसी चुनौती से कम नहीं है। कूरियर, डाक सेवाओं और निजी वाहनों सहित विभिन्न माध्यमों से बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थों की तस्करी होती है। ऑनलाइन और विभिन्न ऐप ने डीलरों का काम और आसान कर दिया है।

एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म

ड्रग डीलर्स भी बड़े पैमाने पर प्रौद्योगिकी को अपना रहे हैं। उदाहरण के लिए कई मामलों में तस्कर शहर में कई स्थानों पर ड्रग्स रखते हैं और राज्य के बाहर बैठे एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर स्थान साझा करते हैं। सिंथेटिक नशीली दवाओं के व्यापार में अफ्रीकी नागरिकों की व्यापक भागीदारी अपनी चुनौतियां खड़ी करती है।