
ठंडी के असर से नारियल बाजार ठंडा
सर्दी के कारण आपूर्ति और मांग दोनों में हुई कमी
मंड्या. पिछले एक महीने से दक्षिण अंदरुनी कर्नाटक क्षेत्र में पारा लगातार गिर रहा है जिस कारण सर्दी बढ़ गई है। सर्द मौसम का सीधा असर फसलों को भी प्रभावित कर रहा है।
मौसम में आए इस बदलाव का सबसे बड़ा खामियाजा मंड्या के मद्दूर तालुक के नारियल उत्पादों को उठाना पड़ रहा है। मद्दूर को कच्चे नारियल का एशिया का सबसे बड़ा बाजार माना जाता है, लेकिन पिछले एक महीने के दौरान बढ़ी ठंड के कारण नारियल की आपूर्ति कम गई है।
पिछले कुछ वर्षों से हर बार सूखे की मार झेल रहे मंड्या में इस बार मानसून के दौरान संतोषजनक बारिश हुई थी, जिससे जिले के नारियल उत्पादों को बेहतर फसल होने की उम्मीद थी। हालांकि न्यूनतम तापमान में आई गिरावट के कारण फसलों की वृद्धि प्रभावित हो रही है। इससे नारियल को पूरी तरह से तैयार होने में ज्यादा समय लग रहा है। वहीं कुछ नारियलों में संतोषजनक वृद्धि नहीं होने से फल काफी छोटा रह रहा है।
बाजार के जानकारों का कहना है कि एक महीने पहले तक जहां हर दिन मद्दुर से ८० से ९० ट्रक नारियल की खेप विभिन्न जिलों में भेजी जा रही थी, वहीं अब इसमें पचास फीसदी की कमी आ गई है। मद्दूर का नारियल न सिर्फ कर्नाटक तक सीमित है, बल्कि महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, केरल, नई दिल्ली, राजस्थान, कोलकाता आदि में भी मांग है। मद्दूर एपीएससी यार्ड में हर दिन आसपास के क्षेत्रों से २ से ३ लाख की संख्या में नारियल आता है, जबकि गर्मी के दिनों में इसकी संख्या बढ़कर ४ लाख रोजाना तक पहुंच जाती है।
आपूर्ति में कमी का सीधा असर कीमत को प्रभावित कर रहा है। एमपीएसी मद्दुर के सचिव श्रीकांत प्रभु के अनुसार बाजार में कम संख्या में नारियल आने के कारण थोक बाजार में नारियल की कीमत इस वर्ष पिछले वर्ष की तुलना में २० प्रतिशत अधिक है। मौजूदा समय में एक नारियल की कीमत १६ से २५ रुपए के बीच है।
ज्यादा ठंड के चलते नारियल से बढ़ी दूरी
एक ओर नारियल की आपूर्ति कम हो रही है तो दूसरी ओर खुदरा बाजार में नारियल की मांग भी कम हो गई है। बेंगलूरु सहित पूरे राज्य में ठंड बढने के कारण लोगों ने नारियल पीने से दूरी बना ली है। ठंड में ठंडी चीजों के खाने पीने से स्वास्थ्य संबंधी परेशानी बढ़ जाती है, इस कारण नारियल पानी से लो परहेज कर रहे हैं।
Published on:
14 Jan 2019 04:17 pm
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