
हर परिवार को सरकार देगी 3800 नकद और राशन
बेंगलूरु. मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी शनिवार को राज्य सरकार की ओर से आयोजित टीपू जयंती के मुख्य कार्यक्रम में भाग नहीं लेंगे। कुमारस्वामी शुक्रवार को चिकित्सकों की सलाह तीन दिन विश्राम करने के लिए शहर के बाहर एक रिजार्ट में चले गए। कुमारस्वामी का नाम समारोह के आमंत्रण पत्र में भी नहीं है।
कुमारस्वामी की अनुपस्थिति में उपमुख्यमंत्री व कांग्रेस नेता डॉ जी परमेश्वर समारोह का उद्घाटन करेंगे। जयंती समारोह के आयोजन का विरोध कर रहे भाजपा के किसी भी नेता का नाम आमंत्रण पत्र में नहीं है। कुमारस्वामी के समारोह में भाग नहीं लेने को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं हैं। हालांकि, कांग्रेस और जद-एस के नेताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री ने समारोह में शामिल नहीं हो पाने के बारे में पहले ही सूचित कर दिया था और दोनों दलों में टीपू जयंती के आयोजन को लेकर कोई मतभेद नहीं है।
जानकारों का कहना है कि कुमारस्वामी ने पहले समारोह में शामिल होने का फैसला किया था लेकिन बाद में राजनीतिक कारणों से उन्हें अपना फैसला बदलना पड़ा। कुमारस्वामी जब २०१४ में टीपू जयंती के खिलाफ कोडुगू में प्रदर्शन के दौरान मरे लोगों को परिजन को सांत्वना देने पहुंचे थे तो जद-एस के सत्ता में आने पर इस आयोजन को बंद करने का आश्वासन दिया था। बताया जाता है कि वोक्कालिगा समुदाय, जिससे कुमारस्वामी आते हैं वह सरकारी स्तर पर टीपू सुल्तान की जयंती के आयोजन के खिलाफ है। इसी कारण कुमारस्वामी ने अंतिम क्षणों में कार्यक्रम से दूर रहने का निर्णय लिया। दूसरा कारण, टीपू सुल्तान से जुड़ा मिथक भी बताया जा रहा है। चर्चा है कि टीपू के महिमामंडन का प्रयास करने वाले लोगों के मुश्किल में घिरने के मिथक के कारण भी कुमारस्वामी और उनका परिवार इस आयोजन से दूर रहना चाहता है। बताया जाता है कि राजनीतिक दबावा के कारण ही विधानसौधा के बैंक्वेट हॉल के बजाय आयोजन स्थल रवींद्र कला क्षेत्र करने का निर्णय लिया था ताकि किसी तरह का विवाद नहीं हो। लेकिन, बाद में पुलिस के सुझाव पर उसमें बदलाव किया गया।
Updated on:
10 Nov 2018, 12:47 AM IST
Published on:
10 Nov 2018, 12:47 AM IST
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