
सूर्य के अति सक्रिय क्षेत्र से निकली सौर ज्वालाओं के कारण पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र पर पडऩे वाले प्रभावों पर देश की पहली सौर अंतरिक्ष वेधशाला आदित्य एल-1 ने नई रोशनी डाली है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने शनिवार को कहा कि आदित्य एल-1 के जरिए अध्ययन किया गया कि सौर तूफान पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र को कैसे प्रभावित कर सकता है।
अक्टूबर 2024 में जब सूर्य के अशांत क्षेत्र से निकली प्रचंड सौर ज्वालाओं ने पृथ्वी के अंतरिक्ष को व्यापक रूप से प्रभावित किया, तो आदित्य एल-1 ने उस घटना का अपने वैज्ञानिक उपकरणों के जरिए गहराई से अध्ययन किया। इस दौरान उपग्रह के जरिए व्यापक आंकड़े जुटाए गए। इसरो के वैज्ञानिकों ने आदित्य के आंकड़ों का उपयोग कर एक शोध किया, जिसमें अन्य अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष अभियानों के आंकड़ों का भी इस्तेमाल किया गया। यह अध्ययन सौर प्लाज्मा के व्यापक विस्फोट के पृथ्वी पर पडऩे वाले प्रभावों को समझने के लिए किया गया, जिसे आदित्य एल-1 ने पकड़ा था। शोध एस्ट्रोफिजिकल जर्नल में प्रकाशित हुआ है।
इसरो ने कहा है कि सूर्य पर होने वाली अस्थायी गतिविधियों जैसे सौर प्लाज्मा विस्फोट के कारण अंतरिक्ष मौसम (स्पेस वेदर) काफी प्रभावित होता है। ये परिघटनाएं पृथ्वी पर उपग्रहों, संचार एवं नेविगेशन सेवाओं के साथ-साथ विद्युत ग्रिड अवसंरचना को भी प्रभावित करती हैं। अध्ययन में यह बात सामने आया कि सौर तूफान ने पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र को अत्यधिक संकुचित कर दिया। इससे पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र असामान्य रूप से पृथ्वी के बहुत निकट आ गया और कुछ समय के लिए भू-स्थिर कक्षा (जियोस्टेशनरी ऑर्बिट) में चक्कर लगा रहे उपग्रह बेहद चुनौतीपूर्ण स्थितियों में आ गए। ऐसा केवल अत्यंत गंभीर अंतरिक्ष मौसम घटनाओं के दौरान ही होता है।
अध्ययन में यह भी सामने आया कि सौर तूफान के दौरान ऑरोरल क्षेत्र (उच्च अक्षांशों) में विद्युत धाराएं अत्यधिक तीव्र हो गईं। यह प्रक्रिया ऊपरी वायुमंडल को गर्म कर सकती है और वायुमंडलीय गैसों के बढ़े हुए पलायन (एटमॉस्फेरिक एस्केप) का कारण बन सकती है। शोध के निष्कर्ष सौर गतिविधियों की लगातार निगरानी की आवश्यकता को और मजबूत करते हैं। इसरो के अनुसार, यह अध्ययन अंतरिक्ष मौसम से जुड़ी घटनाओं को समझने और उनके वास्तविक समय में आकलन की अहमियत को रेखांकित करता है, ताकि महत्वपूर्ण अंतरिक्ष परिसंपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। दरअसल, इस तरह की सौर घटनाओं के दौरान, सूर्य से निकलने वाली ऊर्जा के कारण ऊपरी वायुमंडल गर्म हो जाती है और उसका विस्तार होने लगता है। परिणामस्वरूप, निचली कक्षा में जहां उपग्रह रहते हैं वहां वायुमंडलीय घनत्व बढऩे लगता है और उपग्रहों पर अधिक खिंचाव पैदा होता है। इससे कक्षा में उनकी ऊंचाई घटने लगती है। इस घटना में इसरो के उपग्रहों की कक्षा में गिरावट आई है।
Published on:
13 Jan 2026 08:20 pm
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