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बड़े भाई को पिता तुल्य मानना चाहिए: डॉ. पद्मकीर्ति

श्रीरंगपट्टण में धर्मसभा

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बेंगलूरु. श्रीरंगपट्टण के दिवाकर गुरु मिश्री दरबार में चातुर्मास के लिए विराजित साध्वी डॉ.कुमुदलता की मौन साधना जारी है। कोरोना महामारी से छुटकारा एवं बचाव के लिए गुरुवार को भक्तामर की 45 वीं गाथा का अनुष्ठान कराया गया। साध्वी डॉ. महाप्रज्ञा ने कहा कोरोना का रोना छोड़ो और घर में रहो। धर्म आराधना करो। साध्वी ने कहा आदिनाथ भगवान की स्तुति करके दुखों से मुक्ति पाने के लिए जीवन में मंत्रों की आराधना करें।

आज गुरु भक्त वर्षावास समिति के तत्वावधान में साध्वी डॉ. पदमकीर्ति ने भाई-भाई के आपसी संबंध किस प्रकार मधुर बन सकते हैं उस पर उद्बोधन देते हुए कहा कि भाग्यशाली होते हैं वे जिन्हें बड़ा भाई प्राप्त होता है। जीवन में कोई भी ऊंची-नीची परिस्थिति आए तो बड़ भाई को अवश्य कहें।

थोड़ी सी सहिष्णुता से जीवन सुन्दर
साध्वी ने कहा कि छोटे भाई को बड़े भाई की डांट पड़े तो छोटा भाई सोचे बड़ा भाई मेरे हित के लिए ही कर रहा है। क्योंकि वह भाई है, कोई दुश्मन नहीं है। थोड़ी सी सहिष्णुता से जीवन सुन्दर पात्र बन सकता है। जीवन भव्य आभूषण बन सकता है। बड़े का दिशा निर्देश छोटा भाई ध्यान से सुनकर अनुपालन करें, बड़े भाई को पिता तुल्य माने।

साध्वी ने कहा कि विनय धर्म का मूल है। जड़ के सींचन के अभाव में वृक्ष पर पत्ते, फूल, फल पल्लवित, पुष्पित-फलित नहीं हो सकते हंै वैसे ही छोटा भाई बड़े भाई का विनय करें जिससे बड़े भाई की दुआएं और शुभकामनाएं समय-समय पर मिलती रहे।
बड़े भाई के उपकार हो तो उन उपकार हो तो उन उपकारों से उऋण होने की भावना छोटे भाई के अन्दर होना चाहिए।